प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में कालेधन वालों की अरुचि सहित आज के अखबारों की प्रमुख सुर्खियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएसओ द्वारा जारी किए गए जीडीपी आंकड़ों का हवाला देकर विपक्षी पार्टियों सहित नोटबंदी के आलोचकों पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. बुधवार को उन्होंने कहा, ‘एक तरफ हॉवर्ड की बातें करने वाले हैं और दूसरी तरफ गरीब मां का बेटा है जो हार्ड वर्क से देश की इकनॉमी बदलने में लगा है.’ इस खबर को आज करीब सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बीते मंगलवार को सीएसओ द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया था कि बीते अक्टूबर से दिसंबर के बीच यानी नोटबंदी वाली तिमाही में जीडीपी की रफ्तार में बहुत मामूली गिरावट आई है.
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में कालेधन वालों की अरुचि सहित आज के अखबारों की प्रमुख सुर्खियांअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचिभोटला की हत्या की निंदा करने की खबर को भी अखबारों ने प्रमुखता से जगह दी है. उन्होंने कहा, ‘हम सभी तरह की नफरत, यूहदियों पर हमले की धमकियों और कैंसस में गोलीबारी की निंदा करते हैं. मैंने न्याय विभाग को हिंसा पर काबू पाने के लिए विशेष कार्यबल बनाने के लिए कहा है.’ राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिकी संसद में बोल रहे थे.
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए लोगों का उत्साह नहीं
अघोषित रकम की स्वैच्छिक घोषणा के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के लिए लोगों ने कोई उत्साह नहीं दिखाया है. फरवरी के अंत तक इस योजना के तहत केवल 2500 करोड़ रुपये की नकदी घोषित की गई. इनमें 500 करोड़ रुपये मुंबई सर्किल से आए हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है. केंद्र सरकार ने पिछले साल कालाधन रखने वालों को आखिरी मौका देते हुए इस योजना की शुरूआत की थी. इसके तहत कोई नागरिक 50 फीसदी टैक्स देकर अपना कालाधन सफेद करा सकता है.
अखबार के मुताबिक इस योजना की समयसीमा 31 मार्च को खत्म हो रही है. सरकार ने अनौपचारिक रूप से इस योजना के तहत 75,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर संग्रह का लक्ष्य रखा था. यानी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये नकदी की घोषणा होनी चाहिए. बताया जाता है कि यह लक्ष्य पिछले साल की आय घोषणा योजना के लक्ष्य से दोगुना है.
संशोधित किशोर न्याय कानून के तहत पहली बार दो नाबालिगों को आजीवन कैद की सजा
मध्य प्रदेश के झाबुआ में एक छात्र की हत्या करने के मामले में दो नाबालिग आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. हिन्दुस्तान की एक खबर के मुताबिक निर्भया कांड के बाद बने संशोधित किशोर न्याय कानून के तहत किसी अदालत ने पहली बार दो नाबालिग आरोपितों को इस तरह की सजा सुनाई है. साथ ही, निचली अदालत ने आरोपित बबलू (17) और सोनटिया राजा (16) पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
अखबार ने आरोपितों के खिलाफ दायर किए आरोपपत्र के आधार पर कहा है कि दिसंबर, 2016 में उन्होंने नौवीं कक्षा के एक छात्र से पैसे मांगे थे. छात्र द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर उन्होंने उसकी हत्या कर दी थी. 2012 के निर्भया कांड के बाद संशोधित किशोर न्याय कानून के तहत गंभीर अपराधों में 16 साल से अधिक उम्र के आरोपितों को वयस्क माने जाने का प्रावधान है.
मणिपुर चुनाव में मेरी नहीं बल्कि, मतदाता की समझदारी कसौटी पर है : इरोम शर्मिला
अफ्स्पा के खिलाफ 16 वर्षों तक भूख हड़ताल करने के बाद राजनीति में उतरीं इरोम शर्मिला मानती हैं कि मणिपुर चुनाव में उनकी नहीं बल्कि, मतदाता की समझदारी कसौटी पर है. नवभारत टाइम्स के मुताबिक उन्होंने कहा कि वे पहले भी एक भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ रहीं थीं और अब भी यहीं कर रही हैं. मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ लड़ रहीं इरोम ने संसाधनों की कमी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘संसाधनों की कमी नहीं है और मुझे रैलियां भी नहीं करनी हैं. मतदाता मुख्यमंत्री की भी असलियत जानते हैं और मेरी भी.’
इरोम शर्मिला की पीपुल्स रिसोर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस (प्रजा) पार्टी राज्य की कुल 60 विधानसभा सीटों में से केवल तीन पर लड़ रही है. इतनी कम सीटों पर लड़ने के बारे में उन्होंने कहा, ‘हर लड़ाई तुरंत ऊंचाई पर नहीं पहुंच जाती है. उसकी कहीं से शुरूआत होती है. व्यवस्था परिवर्तन राजनीति से ही संभव है, इसलिए मैंने राजनीति में आने का फैसला किया.’
देश में 53 फीसदी महिलाओं के पास बैंक खाता, पिछले एक दशक के दौरान आंकड़े में तेज बढ़ोतरी
पिछले एक दशक के दौरान देश में महिलाओं के वित्तीय समावेशन में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 53 फीसदी महिलाओं के पास बैंक खाता है. साल 2006 में यह आंकड़ा केवल 15 फीसदी था. अखबार ने नेशनल हेल्थ सर्वे-4 के हवाले से कहा कि महिलाओं के नाम से संपत्ति और पारिवारिक फैसले लेने में भी उनकी भूमिका पहले से बढ़ी है.
सर्वे के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ हिंसा में भी कमी आई है. साल 2014-15 में 28.8 फीसदी महिलाओं के साथ शादी के बाद हिंसा के मामले सामने आए हैं. एक दशक पहले यह आंकड़ा 37.2 फीसदी था. इसके अलावा तीन फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान हिंसा का सामना करतीं हैं.