यह वहीं जस्टिस खेहर हैं, जिन्होंने 1993 के मुंबई विस्फोट के एकमात्र मृत्युदंड प्राप्त दोषी याकूब मेमन के मामले की आधी रात को सुनवाई की थी। याकूब की फांसी की सजा को उच्चतम न्यायालय ने 29 जुलाई 2015 को ठुकरा दिया था, लेकिन कुछ कार्यकर्ता वकीलों ने उसी रात फैसले पर फिर से गौर करने के लिए एक और याचिका दायर की क्योंकि दोषी को 30 जुलाई की सुबह फांसी दी जानी थी।
उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत भी हुआ और 30 जुलाई को रात दो बजे से दो घंटे से ज्यादा समय तक एक पीठ ने विशेष सुनवाई की थी। इसके बाद हाल ही में उन्होंने कहा था कि हमारा अनूठा देश है। बड़ा अपराधी, बड़ा हंगामा।
खेहर ने 18 मार्च को विधि कार्यकर्ताओं से आह्वाहन किया कि वे 2017 को अपराध पीड़ितों के लिए काम करें। दुष्कर्म पीड़ितों, तेजाब हमले के शिकार या अपने घर के एक-मात्र रोजी रोटी कमाने वाले को गंवाने वालों की परिस्थितियों पर हैरानी व्यक्त करते हुए कहा था कि अपराधियों को आखिरी उपाय तक न्याय की पहुंच मिलती है। मगर, अब समय है जब विधि कार्यकर्ता ऐसे प्रभावित लोगों तक पहुंचे, ताकि उन्हें अपेक्षित मुआवजा मिल सके।

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