सपा सरकार के दौरान जिले में यादव पुलिसकर्मियों की भरमार हो गई। मगर, अब वे अपनी जाति के स्थान पर यादव की जगह कुमार और सिंह लिखकर घूम रहे हैं। पुलिस विभाग में यादवों की संख्या कॉन्सटेबल से लेकर अधिकारी तक अधिक रही और पूर्ववर्ती सरकार में अच्छे पदों पर यादवों को अन्य जातियों से ऊपर वरीयता दी गई।
ऐसे में कई मातहतों ने जाति की आड़ में अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक को झड़क दिया था, फिर आम लोगों की बात कौन चलाए। उनकी धमकियों के ऑडियो भी वायरल हुए थे। माना जा रहा है कि पूर्व की सपा सरकार के दौरान यादव नाम के कारण जिन लोगों को अच्छी पोस्टिंग मिली थी, अब उनकी पोस्टिंग जा सकती है। ऐसे में किसी पूर्वाग्रह से बचने के लिए वे ऐसा कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कई पुलिसवालों के दस्तावेजों में यादव जाति का उल्लेख नहीं था। मगर, उन्होंने भी नेमप्लेट पर यादव लिखकर रौब झाड़ना शुरू कर दिया था। मगर, अब वे फिर से सिंह बनकर या सरनेम को छिपाकर अपने तबादले को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। सूबे में सरकार के बदलते ही अधिकारियों की वफादारी भी बदल रही है।

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