प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सांसद व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया जैसे दिग्गज ने 'नो कमेंट" कर चुप्पी साध ली है। वहीं दिग्विजय ने ट्वीट में कहा कि मैं खुश हूं कि 'अंतत: राहुलजी नई टीम बना रहे हैं।"
उधर, राज्यसभा सदस्य सत्यव्रत चतुर्वेदी के सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने और दिग्विजय सिंह कोतमिलनाडु भेजने के बयान पर दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने चतुर्वेदी (लोकसभा और विधानसभा सदस्य रहे चुके हैं) को लेकर कहा है कि वे पार्षद का चुनाव जीतकर बता दें, फिर दिग्विजय सिंह पर बयान दें। वहीं, दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे महेश जोशी ने 13 साल बाद उनके दूसरे मुख्यमंत्रित्वकाल की खामियों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि तब सिंह का व्यवहार और उनकी खराब नीतियों के कारण कांग्रेस हारी थी।
बिना संकोच फैसले ले हाईकमान
पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि हाईकमान जल्दी-जल्दी फैसले कर रहा है, बहुत अच्छा है। जिनकी उपयोगिता नहीं हैं, उन्हें बिना संकोच हटाया जाए। विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि दिग्विजय ने हाईकमान से आग्रह किया था, इसलिए कर्नाटक-गोवा में दूसरे प्रभारी भेजे हैं। लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट में कहा कि सत्यव्रत चतुर्वेदी जैसे नेताओं के कारण कांग्रेस हारती है तो चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी छोड़कर बीजेपी जाने वाले लक्ष्मण सिंह पहले अपनी गिरेबां में झांककर देखें।
इधर, भाजपा ने ली चुटकी...
दिग्विजय को हटाने का सस्पेंस वैसा है जैसे कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा
दिग्विजय सिंह को लेकर टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस के साथ भाजपा नेता भी पीछे नहीं हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सिंह से गोवा और कर्नाटक के प्रभारी की जिम्मेदारी छिनने के बादट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी ने अपने गुरु दिग्विजय के पर क्यों कतरे, यह सस्पेंस उसी तरह है जैसे कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?
वहीं, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल के मुताबिक दिग्विजय सिंह को प्रभार से हटाना और उन पर सत्यव्रत चतुर्वेदी की टिप्पणी और चतुर्वेदी पर लक्ष्मण सिंह का पलटवार ये उजागर करता है कि कांग्रेस नेताओं में भीषण अलगाव है। इससे आने वाले दिनों में प्रदेश में राजनीतिक मनोरंजन दिखेगा। प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक गंभीरता समाप्त हो चुकी है।

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