नंबर वन खिलाड़ी बनकर उभरे संकटमोचक नरोत्तम मिश्रा

मंथन ऩ्यूज भोपाल(पीआईसी ब्यूरो)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकटमोचक कहे जाने वाले जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर लगे पेड न्यूज के लांछन पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच आगामी 10 जुलाई को फैसला देगी। आज वकीलों की हड़ताल के कारण मामले में स्वयं नरोत्तम मिश्रा ने अपनी पैरवी की । अदालत ने शिकायत कर्ता राजेन्द्र भारती के निवेदन को स्वीकार करते हुए अगली तारीख दी है।
प्रदेश के मुखर न्यायाधीश संजय यादव की नियुक्ति से नाराज ग्वालियर के वकीलों ने आज अपना कामकाज बंद रखा था। इस हड़ताल की सूचना कांग्रेस के पराजित नेता और शिकायत कर्ता राजेन्द्र भारती ने अपने वकील कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा को दे दी थी। वकीलों के आग्रह को देखते हुए दोनों वकीलों ने आज पैरवी करने से इंकार कर दिया। इसके विपरीत जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने ऊपर लगे इस आरोप से जल्दी छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने वकीलों की हड़ताल की परवाह न करते हुए स्वयं पैरवी करने का फैसला लिया।
नरोत्तम मिश्रा ने पीठासीन न्यायाधीश विवेक अग्रवाल को बताया कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं। केवल अखबार की कतरनों की फोटो कापी के आधार पर ये प्रकरण बनाया गया है। शिकायत कर्ता ने इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिए हैं। अखबारों ने भी इस संबंध में कोई शिकायत नहीं की है। चुनाव आयोग की निगरानी समिति ने भी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने इकतरफा फैसला दिया है। वर्ष 2008 के इस चुनाव के बाद वे 2013 में एक बार फिर जनादेश ले चुके हैं। ये मामला पिछले जनादेश से संबंधित है। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने उनकी सदस्यता पर सवाल उठाकर उचित फैसला नहीं लिया है।
श्री मिश्रा ने खुद पैरवी करके अपना पक्ष मजबूत कर लिया है। समझा जा रहा था कि अदालत इस मामले पर अपना फैसला आज ही दे देगी। इसके बावजूद शिकायत कर्ता के अधिकार का सम्मान करते हुए उन्हें अगली पेशी पर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 10 जुलाई का समय दिया गया है।कांग्रेस ने इस मामले में कल श्री मिश्रा के निवास पर प्रदर्शन किया था। कांग्रेस का एक धड़ा इस मुद्दे पर मिश्रा को घेरने में जुटा हुआ है। ये घेरेबंदी तब हो रही है जब नरोत्तम मिश्रा पार्टी में संकटमोचक के रूप में सफल होते जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यूपी चुनाव में श्री मिश्रा की पार्टी आलाकमान से करीबी की खबरें आने के बाद चुनाव आयोग ने ये फैसला कथित तौर पर जल्दबाजी में दिया है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था, “मैं अभी भी विधायक और मंत्री हूं.” मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्री मिश्रा भी शामिल हुए और बैठक के बाद उन्होंने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी संवाददाताओं को दी. संवाददाताओं ने जब उनसे निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल किया, तो उनका जवाब था, “आयोग को इस तरह का फैसला लेने का अधिकार नहीं है, यह बात विधानसभाध्यक्ष भी कह चुके हैं, वर्तमान में मैं विधायक और मंत्री भी हूं.”
उन्होंने आयोग की प्रक्रिया और फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को मामले की जानकारी विधानसभा अध्यक्ष को जानकारी देनी चाहिए, विधानसभा अध्यक्ष विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर उसे कैबिनेट को भेजें और कैबिनेट राज्यपाल को भेजें, ऐसा होना चाहिए. फिलहाल यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित है. आयोग के फैसले के खिलाफ मिश्रा ने ग्वालियर उच्च न्यायालय की खंडपीठ में याचिका दायर की थी, वहीं भारती ने केविएट भी दायर की थी. आज उसी मामले में सुनवाई थी।
नरोत्तम मिश्रा वर्ष 2008 में दतिया क्षेत्र से विधानसभा चुनाव जीते थे. उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राजेंद्र भारती ने वर्ष 2009 में निर्वाचन आयोग में शिकायत कर चुनाव खर्च का सही ब्योरा न देने और पेड न्यूज छपवाने का आरोप लगाया था. मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के बाद निर्वाचन आयोग तक पहुंचा. आयोग ने भारती की शिकायत को सही पाते हुए मिश्रा को फैसले की तारीख से तीन साल के लिए चुनाव लड़ने में अयोग्य ठहराया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस के विधि विशेषज्ञ सोमवार को एक साथ बैठे और अगली रणनीति पर चर्चा की. पार्टी के विधि विभाग के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल व पी. चिंदंबरम के साथ बैठक की. बैठक में फैसला किया गया कि मिश्रा के खिलाफ याचिका लगाने वाले राजेंद्र भारती की ओर से जाने-माने अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा पैरवी करेंगे वहीं चिदंबरम और अभिषेक मनु सिंघवी भी सलाह देंगे.
अब तक की सुनवाई के आधार पर कहा जा रहा है कि श्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ उठा ये मामला अदालत में टांय टांय फिस्स हो जाएगा। यदि अगली पेशी पर ये बात सच साबित होती है तो फिर शाश्वत सवाल ये है कि श्री मिश्रा पर ये जाल किसके इशारे पर फेंका गया । शिकायत कर्ता श्री भारती 2008 में बहुजन समाज पार्टी के टिकिट पर चुनाव लड़े थे और 11233 मतों से चुनाव हारे थे। इसके बाद 2013 में वे कांग्रेस के टिकिट से चुनाव लड़े और इस बार उनकी हार 11,697 मतों से हुई। जाहिर है कि लोकप्रियता के स्तर पर नरोत्तम मिश्रा हर बार उनसे भारी ही साबित हुए हैं। जबकि श्री मिश्रा इसके पहले डबरा से चुनाव लड़ते रहे थे। मौजूदा विवाद के बाद श्री मिश्रा की लोकप्रियता में इजाफा ही हुआ है।
दरअसल श्री मिश्रा ने लगातार प्रदेश में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। सरकार के संकटमोचक के रूप में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लगातार प्रदर्शन किया है। हाल ही यूपी के चुनावों में उनकी लोकप्रियता और कुशल संवाद क्षमता का लोहा भाजपा हाईकमान ने भी माना। इसके बाद श्री मिश्रा के प्रतिद्वंदी उनकी टांग खिंचाई में जुट गए हैं। खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार जताने वाले पंचायत मंत्री पं. गोपाल भार्गव हों या वित्तमंत्री जयंत मलैया वे दबे छुपे अपने कांग्रेसी संबंधों के माध्यम से श्री मिश्रा के खिलाफ आग भड़काने का जतन करते देखे जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और कांग्रेस प्रवक्ता के.के.मिश्रा इस मामले में काफी मुखर होकर विरोध कर रहे हैं। जबकि उनकी राजनीतिक चालें श्री मिश्रा की सफलता की बूस्टर बनकर अपना असर दिखा रहीं हैं। मौजूदा मामले में श्री मिश्रा ने जिस तरह बहादुरी से अपना पक्ष रखा है उससे वे प्रदेश में पहले नंबर के राजनीतिक खिलाड़ी बनकर उभरे हैं।