-विपरीत परिस्थितियों में कायम जनतांत्रिक बादशाहत बनेगी मिशाल
शिवपुरी ब्यूरो। बहुत कम लोग जगत के प्रकारों के बारे में जानते हैं। अध्यात्म में सूक्ष्म जगत और भाव जगत का विशेष महत्व है। इन परालोकिक जगतों में भौतिक जगत के निर्मित नियम और सिद्धांत लागू नहीं होते हैं। कहने का सार तत्व यह है कि भौतिक जगत की अपनी सीमायें हैं जिनमें बंधकर हम न तो बीते कल को बदल सकते हैं और न ही आने वाले कल को देखकर उसे सुधार सकते हैं लेकिन सूक्ष्म जगत और भाव जगत में हम भूत और वर्तमान में न सिर्फ साक्षी भाव से सबकुछ देख सकते हैं बल्कि आने वाले कल में क्या घटने वाला है? क्या घटना चाहिए! का निर्णय भी साधक अपनी सामथ्र्य के अनुरूप कर सकता है। भाव जगत पर अपने तरीके से शोध करने वाले सत्यम पाठक का कहना है कि हाल ही में प्रदेश मंत्री नरोत्तम मिश्रा के विरूद्ध पेड न्यूज के मामले में आये चुनाव आयोग के निर्णय को लेकर जो जन भाव सामने आए हैं उनसे यह तय है कि भाव जगत में नरोत्तम मिश्रा रक्षा कवच के साथ हैं। अधिकांशों का स्वप्रेरित भाव यह है कि राजनीति के नरोत्तम का कुछ नहीं बिगडऩा चाहिए! शिवपुरी में अपनी जान पर खेलकर पूनम पुरोहित ने उनका पुतला नहीं जलने दिया। पूनम ने अपनी जान दांव पर लगाकर यह साबित किया कि मौजूदा राजनीति में नरोत्तम मिश्रा विरला व्यक्तित्व रखते हैं। उनके जैसा सहृदयी और परपीड़ा का काया प्रवेश लेने वाला कोई दूसरा व्यक्ति मुश्किल से ही मौजूदा दौर में मिलेगा। पूनम के अतिरिक्त दूसरा उदाहरण दतिया के एक पार्षद का है जिसने बकायदा एक बैठक में अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि जो (नरोत्तम मिश्रा)हमारे लिए दिन रात तैयार हैं उनके लिए हमें जान देनी भी पड़ें तो हमें हिचकना नहीं चाहिए। इन दो बड़े उजागर घटनाक्रमों के अतिरिक्त अधिकांशों के व्यक्त-अव्यक्त भाव यह बताते हैं कि भाव जगत में नरोत्तम मिश्रा रक्षा कवच पहने हुए हैं और संभावित तथ्य यह हो सकता है कि इसी रक्षा कवच की बजह से उनका पुतला उनकी पार्टी के घुर राजनीतिक विरोधी (कांग्रेसी) लाख कोशिशों के बाबजूद नहीं जला पाये। प्रत्यक्ष में हम कारण पूनम को मान सकते हैं जन भावनायें जिस बेग में भाव जगत में अपना प्रभाव छोड़कर नरोत्तम के लिए रक्षा कवच का निर्माण कर रही हैं उससे भौतिक जगत में नरोत्तम का कुछ बिगड़ेगा! कहना बड़ा मुश्किल हैं। हाल ही में उन्हें शीर्ष न्यायालय से जो राहत मिली हैं उसमें देखने वाले भाव जगत में रक्षा कवच का प्रभाव देख सकते हैं। वर्तमान भौतिक जगत में राजनीति करने वाले नेताओं के लिए उपरोक्त घटनाक्रमों में घटे घटनाक्रम से यह सीखना चाहिए कि भयंकर विपरीत परिस्थितयों में भी जनतांत्रिक बादशाहत कैसे कायम रखी जा सकती है? दिलों पर राज कैसे किया जा सकता है? कैसे...? इनके जवाब प्रदेश मंत्री नरोत्तम मिश्रा की कार्यप्रणाली और व्यवहार में देखे खोजे जा सकते हैं। जय हो राजनीति के नरोत्तम की।

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