सरकार ने इस संबंध में वित्त विधेयक 2017 के जरिये आयकर कानून की धारा 132 (ए) में संशोधन किया है। दरअसल धारा 132(ए) के तहत आयकर अधिकारी को किसी के भी यहां सर्च करने से पहले तैयार किए जाने वाले सैटिस्फैक्शन नोट में साफ-साफ यह लिखना होता था कि उसे इसके बारे में सूचना किससे मिली।
इसी नोट को आधार बनाकर अधिकारी काला धन रखने वाले व्यक्ति के यहां सर्च करने का आदेश जारी करता था। हालांकि जब वह व्यक्ति विभाग की सर्च कार्रवाई को चुनौती देता था तो विभाग को वह सैटिस्फैक्शन नोट उसे देना पड़ता था। इस तरह काला धन रखने वाले को पता चल जाता था कि उसके खिलाफ किसने शिकायत की है।
इसके चलते विगत में विभाग को अघोषित आय के बारे में सूचना देने वालों की संख्या में कमी आने लगी थी। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने वित्त विधेयक 2017 के माध्यम से धारा 132(ए) में संशोधन किया है। लोकसभा ने मंगलवार को ही इस संशोधन पर मुहर लगाई है। यह संशोधन पूर्व-प्रभाव से लागू होगा।
इसका मतलब यह है कि पुराने मामलों में भी यह संशोधन प्रभावी होगा। संशोधन के प्रभाव में आने के बाद विभाग ने जिस व्यक्ति के खिलाफ भी सर्च कार्रवाई की है, उसे सैटिस्फैक्शन नोट देने की बाध्यता नहीं होगी। अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी यह नोट देखने का अधिकार नहीं होगा।
अगर अदालत चाहेगी तो उस सैटिस्फैक्शन नोट को देख सकेगी, लेकिन अघोषित आय के मालिक या कर चोरी के आरोपी को उसकी कॉपी नहीं दी जाएगी। ऐसा होने पर आयकर विभाग को सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जा सकेगा।
आयकर विभाग ने दी चेतावनी
आयकर विभाग ने काला धन रखने वालों को चेतावनी दी है। विभाग ने कहा है कि उसके पास ऐसे काला धन वालों की ओर से जमा की गई गैरकानूनी राशि की जानकारी है। अगर इस कालिख से बाहर निकलना चाहते हैं तो वे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ उठाकर ऐसा कर सकते हैं।
यह योजना 31 मार्च को समाप्त हो रही है। इसके तहत अघोषित आय का 49.9 फीसद टैक्स और पेनाल्टी के रूप में अदा करना होगा। विभाग ने ऐसा करने वालों की जानकारी गोपनीय रखने का भी भरोसा दिया है।
अगर 31 मार्च के बाद स्क्रुटनी असेसमेंट किसी के पास अघोषित आय का पता लगा तो उन्हें 83.25 फीसद बतौर टैक्स और जुर्माना चुकाने होंगे। अगर छापेमारी के दौरान उनकी काली कमाई पकड़ी गई तो फिर उन्हें 107.25 से लेकर 137.25 फीसद टैक्स और जुर्माना भरना होगा।

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