माता-पिता के लिए यह रकम पहाड़ जैसी है। लेकिन, उन्हें उम्मीद है कि समाज में कोई न कोई सिद्घी की जिंगदी बचाने के लिए आगे आएगा। यही वजह है कि पिता पंडित चतुरनारायण ने उसे दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलयरी सर्जरी (आईएलबीएस) में भर्ती कराया है।
भानपुर भोपाल के रहने वाले चतुरनारायण पुजारी हैं। सिद्घी के अलावा उनके दो बेटे हैं। दोनों स्कूल में पढ़ते हैं। चतुरनारायण ने बताया कि करीब छह महीने पहले सिद्घी के पेट में दर्द और उल्टी होने लगी। उसे पीपुल्स मेडिकल कॉलेज, मिरैकल अस्पताल, लखनऊ के पीजीआई अस्पताल और दिल्ली के सर गंगाराम राम अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया। आखिर में डॉक्टरों यही कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा बच्ची को बचाने का कोई विकल्प नहीं है। छह महीने से आधा दर्जन अस्पतालों में इलाज के बाद अब उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं बचे हैं। लाखों रुपए उधारी हो गए हैं।
लिवर में जमा हो गया तांबा
आईएलबीएस की डॉ. सीमा अलाम ने कहा कि बच्ची के लिवर में जन्म से दिक्कत है। उसके लिवर में कॉपर (तांबा) जमा हो गया है। तांबे की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि लिवर ने काम करना बंद कर दिया है। इस बीमारी को विल्सन डिसीज कहा जाता है। बहुत ही कम लोगों को यह बीमारी होती हैं। बीमारी से बच्ची की दिमाग में असर आने लगा है। उन्होंने बताया कि जल्द लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हुआ तो दिमाग में असर बढ़ने से बच्ची की जिंदगी जोखिम में पड़ जाएगी।
यहां पैसे जुटाने के लिए सुंदर कांड का सहारा
पं. चतुरनारायण के मित्र पं. अमितानंद लिवर ट्रांसप्लांट के लिए पैसे जुटाने के खातिर जगह-जगह सुंदर कांड का पाठ कर रहे हैं। इस दौरान वे वहां मौजूद श्रद्घालुओं को सिद्घी को बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बच्ची की हालत को देख काफी लोग दान के लिए आगे आ रहे हैं। दो-तीन दिन में 35 हजार रुपए इकठ्ठे हो गए हैं। मदद के लिए सिद्घी के पिता चतुरनारायण से मोबाइल नंबर 9827256179 पर संपर्क कर सकते हैं।
पूनम पुरोहित 
Post a Comment