कपड़ा व्यापार : अभी खुद ही खाना पड़ेगा घाटा

मंथन ऩ्यूज संवाददाता, चंडीगढ़ : जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा व्यापारियों में भी शनिवार को असंतोष का माहौल रहा। व्यापारियों को एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग से अभी जीएसटी नंबर ही नहीं मिला है, जिसके चलते वे पुराने रेट पर ही कपड़ा बेच रहे हैं। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि कुछ दिन उन्हें खुद ही इसका भार उठाना पड़ेगा, क्योंकि अभी भी उन्हें जीएसटी को लेकर कंफ्यूजन है कि वह इसे कैसे वसूल करें। रविवार को व्यापारियों ने जीएसटी मामले को लेकर बैठक बुलाई है।

शहर में जो व्यापारी जीएसटी वसूल भी रहे हैं, उनका कहना है कि लोग इसे भरने के लिए तैयार नहीं हैं। क्योंकि अभी भी इसमें कंफ्यूजन है। चार्टड अकाउंटेंट व एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के अधिकारी दोनों इसे अलग-अलग तरह वसूलने की बात कर रहे हैं, जिसके चलते अभी भी कुछ साफ नहीं है।

टैक्स कैसे वसूल करें, नहीं हो रहा साफ : सचदेवा

सेक्टर-19 के कपड़ा व्यापारी अशोक सचदेवा ने कहा कि अभी भी उन्हें साफ नहीं है कि वह टैक्स आखिर कैसे वसूल करें। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी व चार्टड अकाउंटेंट दोनों ने उन्हें कंफ्यूजन में डाल रखा है। वह किसी कपड़े के बिल पर अलग से जीएसटी लगाकर दे रहे हैं, तो ग्राहक उसे देने को तैयार नहीं है, जिसके चलते उन्हें परेशानी हो रही है।

जीएसटी नंबर नहीं मिला तो कैसे करें वसूल : केवल कृष्ण

कपड़ा व्यापारी केवल कृष्ण ने कहा कि अभी उन्हें जीएसटी नंबर नहीं मिला है, जिसके चलते वह जीएसटी वसूल नहीं रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन उन्हें खुद ही घाटा खाना पड़ेगा, जब तक नंबर नहीं मिलता है। लोग भी ऐसे जीएसटी भरने को तैयार नहीं होंगे, जब तक सही रूप से उनके पास इसकी जानकारी नहीं होगी कि वह इसे कैसे वसूल करें।

अभी बिलिंग के बारे में जानकारी ही नहीं : सिंह

व्यापारी तेजिंद्र सिंह ने बताया कि अभी फिलहाल उन्हें बिलिंग के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले कपड़े पर कोई सीधा टैक्स नहीं था, लेकिन अब 5 प्रतिशत लगा दिया गया है, जबकि रेडीमेड गारमेंट्स पर 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत लगा दिया गया है। व्यापार पहले से ही मंदी से गुजर रहा है। यही कारण है कि जीएसटी के बाद वह दुकानें पर फ्री बैठे मक्खियां मार रहे हैं।

थोक रेडीमेड कपड़ा व्यापारियों पर भी असर : चरणजीव सिंह

जीएसटी का असर थोक रेडीमेड कपड़ा व्यापारियों पर भी देखने को मिल रहा है। इस संबंध में मनोनीत पार्षद व व्यापारी चरणजीव सिंह ने कहा कि बिलिंग के बारे में उन्हें जानकारी दे दी गई है, लेकिन बिल बनाने में अभी थोड़ा समय लगेगा, जिसके चलते तीन चार दिन तो उनका काम ठप ही रहेगा।