राहुल गांधी ने कहा कि ये समझना होगा कि चीन तेजी से बढ़ रहा है तो हमें उसी दिशा में काम करना होगा. हमें उन मौलिक प्रश्नों को ढूंढना होगा कि आखिर चीन किस वजह से विकास कर रहा है. दोनों देशों के विकास मॉडल में फर्क है. कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हमें चीन से प्रतिस्पर्धा करना होगा, जो हम नहीं कर पा रहे हैं. चीन का दृष्टिकोण स्पष्ट है, हमें भी इसपर काम करने की जरूरत है.भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी समस्या धुर्वीकरण है. कानून बनाने की प्रक्रिया में हमें और भी पारदर्शिता लाने की जरूरत है. मैंने पार्टी में पारदर्शिता लाने की कोशिश की है. हालांकि कई लोगों को यह पसंद नहीं है.
केंद्र सरकार के 'मेक इन इंडिया' का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने अमेरिकी यूनिवर्सिटी में कहा, 'मैं सोचता हूं कि 'मेक इन इंडिया' से छोटे और मध्यम उद्योगों को लाभ पहुंचाना चाहिए था, लेकिन इससे बड़े उद्योगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है.' राहुल गांधी ने कहा भारत में लैंगिक समानता के लिए भी पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. हमने राजनीति में अच्छाई के लिए काफी काम किया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में काफी काम करने की जरूरत है, यहां से रोजगार के काफी अवसर पैदा हो सकते हैं.
राहुल गांधी दो सप्ताह की अमेरिका यात्रा पर हैं. उन्होंने यहां विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े थिंक टैंक सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस (सीएपी) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भी शिरकत की थी. कांग्रेस उपाध्यक्ष ने इस दौरान भारत और दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञों जैसे सीएपी प्रमुख नीरा टंडन, भारत में अमेरिकी राजदूत रहे रिचर्ड वर्मा और हिलेरी क्लिंटन के प्रचार अभियान के सलाहकार रहे जॉन पोडेस्टा के साथ मौजूदा मसलों पर विचार-विमर्श किया.

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