पूनम पुरोहित मंथनन्यूज़ -मध्य प्रदेश में राम की नगरी यानी चित्रकूट में विधानसभा उपचुनाव के लिए उल्टी गिनती शुरु हो गई है. हर हाल में 30 नवम्बर तक यहां नए विधायक का चुना जाना तय है. ऐसे में चुनाव आयोग के साथ-साथ राजनैतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियों की रफ्तार बढ़ा दी है.सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस की ओर से विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की प्रतिष्ठा उपचुनाव में दांव पर होगी. क्योंकि भाजपा स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री की अगुवाई में ही किसी भी चुनाव के मैदान में उतरती है.
वहीं चित्रकूट, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कार्यक्षेत्र है. कांग्रेस विधायक प्रेम सिंह के निधन के कारण चित्रकूट में उपचुनाव होना है. चुनावी बिसात बिछाने में भाजपा, कांग्रेस आगे निकल गई है.
कांग्रेस के कब्जे से इस सीट को हथियाने के लिए प्रदेश भाजपा संगठन ने प्रदेश महामंत्री वीडी शर्मा और उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को उपचुनाव की बिसात बिछाने की जिम्मेदारी सौंपी है. इसकी वजह है चित्रकूट में अब तक भाजपा को एक ही बार चुनावी जीत नसीब होना. बाकी समय इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है.
खुद मुख्यमंत्री 3 बार चित्रकूट का दौरा कर इस क्षेत्र के लिए ताबड़तोड़ घोषणाएं कर चुके हैं. यही नहीं भाजपा ने अपने प्रदेश महामंत्री बीडी शर्मा को उपचुनाव का जिम्मा सौंप दिया है.
चित्रकूट क्षेत्र का कई बार दौरा कर शर्मा मतदाताओं का नब्ज भी टटोल चुके हैं. जहां तक कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का सवाल है, पार्टी में राज्य स्तर पर इस चुनाव को लेकर कोई खास तैयारियां अभी दिखाई नहीं दी हैं. न ही चुनाव प्रभारी के तौर पर किसी को जिम्मा सौंपा गया है.
इसी बीच बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत और रिटार्यड आईएफएस आजाद सिंह डबास की चित्रकूट की जमी पर सरकार विरोधी बोल ने भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है.
भाजपा का कभी गढ़ नहीं रही 'राम की नगरी'
चित्रकूट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है, कि एक बार 2008 को छोडक़र भाजपा को यहां कभी सफलता नहीं मिली, इसमें भी मतों का अंतर बहुत कम मात्र 700 रहा.
दिवंगत कांग्रेस विधायक प्रेमसिंह साल 1998, 2003 और 2013 में भारी मतों के अंतर से जीतते रहे. 2013 विधानसभा चुनाव में प्रेमसिंह ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार को 12 हजार मतों से हराकर जीता था.
दो 'अफसरों' ने बढ़ाई मुश्किलें
चित्रकूट सीट के खुद के सर्वे में भाजपा ने पाया है कि पार्टी के पक्ष में पूरी तरह से माहौल अनुकूल नहीं है. कांग्रेस के पक्ष में जहां सहानुभति है, वहीं भाजपा के सामने प्रत्याशी का चेहरा सहित एंटी इनकमबेंसी महत्वपूर्ण मसला है.
दूसरी ओर हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त दलित आईएएस महिला अधिकारी शशि कर्णावत, रिटार्यड आईएफएस अधिकारी और सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास की चित्रकूट में सक्रियता ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है.
शशि कर्णावत और सिस्टम परिवर्तन को लेकर अभियान छेड़ने वाले डबास ने चित्रकूट में किसी राजनीतिक मंच से नहीं, लेकिन कई सभाओं में भ्रष्टाचार, गरीबी और कुपोषण को लेकर राज्य की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ा.
दलित वर्ग से आने वाले दोनों पूर्व बड़े अफसरों की गैरराजनीतिक मंच से सरकार को तरेरना प्रदेश भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है।.
यूपी के 'चित्रकूट' में लहराया भगवा
उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र, कभी समाजवादियों का गढ़ माना जाता था. बाद में बसपा और कांग्रेस ने क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया. खासबात यह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में चित्रकूट नाम से दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र हैं. ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे से लगे हुए हैं.
इसी साल मार्च में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में, वहां के चित्रकूट सीट से भाजपा के चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने सपा प्रत्याशी को 27 हजार मतों के बड़े अंतर से हराया है. देखना यह होगा कि उत्तरप्रदेश में 6 माह पहले भाजपा के पक्ष में बही बयार मध्यप्रदेश के चित्रकूट सीट पर होने वाले उपचुनाव पर क्या असर डालेगी?
डेढ़ लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की बहुतायत है. पूरा क्षेत्र ब्राह्मण और कुर्मी बाहुल्य है. यहां के चित्रकूट और जैतवारा ही कस्बाई इलाके हैं. हाल ही में हुए नगरीय निकायों के चुनाव में जैतवारा परिषद में भाजपा ने जबकि चित्रकूट नगर परिषद में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी ने जीत हासिल की.
फिलहाल, चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय है लेकिन शशि कर्णावत, आजाद सिंह डबास की सक्रियता से उपचुनाव में तीसरे की दस्तक से इंकार नहीं किया जा सकता.
चित्रकूट क्षेत्र का कई बार दौरा कर शर्मा मतदाताओं का नब्ज भी टटोल चुके हैं. जहां तक कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का सवाल है, पार्टी में राज्य स्तर पर इस चुनाव को लेकर कोई खास तैयारियां अभी दिखाई नहीं दी हैं. न ही चुनाव प्रभारी के तौर पर किसी को जिम्मा सौंपा गया है.
इसी बीच बर्खास्त आईएएस शशि कर्णावत और रिटार्यड आईएफएस आजाद सिंह डबास की चित्रकूट की जमी पर सरकार विरोधी बोल ने भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है.
भाजपा का कभी गढ़ नहीं रही 'राम की नगरी'
चित्रकूट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है, कि एक बार 2008 को छोडक़र भाजपा को यहां कभी सफलता नहीं मिली, इसमें भी मतों का अंतर बहुत कम मात्र 700 रहा.
दिवंगत कांग्रेस विधायक प्रेमसिंह साल 1998, 2003 और 2013 में भारी मतों के अंतर से जीतते रहे. 2013 विधानसभा चुनाव में प्रेमसिंह ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार को 12 हजार मतों से हराकर जीता था.
दो 'अफसरों' ने बढ़ाई मुश्किलें
चित्रकूट सीट के खुद के सर्वे में भाजपा ने पाया है कि पार्टी के पक्ष में पूरी तरह से माहौल अनुकूल नहीं है. कांग्रेस के पक्ष में जहां सहानुभति है, वहीं भाजपा के सामने प्रत्याशी का चेहरा सहित एंटी इनकमबेंसी महत्वपूर्ण मसला है.
दूसरी ओर हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त दलित आईएएस महिला अधिकारी शशि कर्णावत, रिटार्यड आईएफएस अधिकारी और सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास की चित्रकूट में सक्रियता ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है.
शशि कर्णावत और सिस्टम परिवर्तन को लेकर अभियान छेड़ने वाले डबास ने चित्रकूट में किसी राजनीतिक मंच से नहीं, लेकिन कई सभाओं में भ्रष्टाचार, गरीबी और कुपोषण को लेकर राज्य की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ा.
दलित वर्ग से आने वाले दोनों पूर्व बड़े अफसरों की गैरराजनीतिक मंच से सरकार को तरेरना प्रदेश भाजपा के लिए सिरदर्द बन गया है।.
यूपी के 'चित्रकूट' में लहराया भगवा
उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र, कभी समाजवादियों का गढ़ माना जाता था. बाद में बसपा और कांग्रेस ने क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया. खासबात यह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में चित्रकूट नाम से दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र हैं. ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे से लगे हुए हैं.
इसी साल मार्च में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में, वहां के चित्रकूट सीट से भाजपा के चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने सपा प्रत्याशी को 27 हजार मतों के बड़े अंतर से हराया है. देखना यह होगा कि उत्तरप्रदेश में 6 माह पहले भाजपा के पक्ष में बही बयार मध्यप्रदेश के चित्रकूट सीट पर होने वाले उपचुनाव पर क्या असर डालेगी?
डेढ़ लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की बहुतायत है. पूरा क्षेत्र ब्राह्मण और कुर्मी बाहुल्य है. यहां के चित्रकूट और जैतवारा ही कस्बाई इलाके हैं. हाल ही में हुए नगरीय निकायों के चुनाव में जैतवारा परिषद में भाजपा ने जबकि चित्रकूट नगर परिषद में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी ने जीत हासिल की.
फिलहाल, चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय है लेकिन शशि कर्णावत, आजाद सिंह डबास की सक्रियता से उपचुनाव में तीसरे की दस्तक से इंकार नहीं किया जा सकता.

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