पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ गुजरात -गुजरात चुनावों से पहले भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. अहमद पटेल पर लगे आरोपों को लेकर भाजपा ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है. भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस सुधार करने के बजाय केवल भाजपा पर आरोप लगाने में लगी है.उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह कदम अहमद पटेल को संदेह के घेरे में ला खड़ा करती है. कांग्रेस को भाजपा पर आरोप लगाने की अपेक्षा अपने पार्टी में सुधार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अब तक लोग कहते थे कांग्रेस का हाथ करप्शन के साथ लेकिन अब लोग कह रहे है कांग्रेस का हाथ आतंकवादियों के साथ.
इधर, कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी द्वारा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पर लगाये गये आरोपों पर पलटवार किया. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा गुजरात में अपनी हार को देखते हुए ओछे हथकंडों एवं षड्यंत्रकारी हरकतों पर उतर आयी है. पार्टी ने यह भी कहा कि पटेल या उनके परिवार का उस अस्पताल से कोई संबंध नहीं है जहां पर काम कर चुके एक व्यक्ति को गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया है.
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पटेल से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कल आरोप लगाया था कि हाल ही में गिरफ्तार किया गया आतंकी संगठन आईएसआईएस का एक संदिग्ध सदस्य उस अस्पताल में काम करता था, जहां पटेल पहले एक ट्रस्टी थे.
हालांकि, पटेल ने आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताकर कल ही खारिज कर दिया और भाजपा से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण ना करने तथा गुजरात के शांति प्रिय लोगों को नहीं बांटने की अपील की थी.
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, साढे़ छह करोड़ गुजरातियों द्वारा नकार दिए जाने से व्यथित एवं गुजरात चुनाव में आसन्न हार देख भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ओछे हथकंडों, षड्यंत्रकारी हरकतों व ऊलजलूल बयानबाजी पर उतर आए हैं.
गुजरात के चुनाव में कामयाबी पाने के लिए भाजपा नेता नित नया स्वांग व प्रपंच रच रहे हैं. उन्होंने कहा, कल देर रात भाजपा नेतृत्व एवं गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल के बारे में बौखलाहट भरे षड्यंत्रकारी आक्षेप लगाने का कुत्सित प्रयास किया गया. जो यह दर्शाता है कि निकम्मी व नाकारा भाजपा सरकार का मुखिया हार के डर से राजनीतिक ओछेपन के किस निम्न स्तर तक गिर सकता है.’’
सुरजेवाला ने कहा, सच्चाई जगजाहिर है. अंकलेश्वर, जिला भरुच में बना सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल एक ट्रस्ट द्वारा संचालित चैरिटेबल अस्पताल है. यह अस्पताल ग्रामीण अंचल में गुजरात के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है. उन्होंने कहा, अहमद पटेल या उनके परिवार का कोई सदस्य न तो अस्पताल का संचालन करने वाली ट्रस्ट का सदस्य है और न ही अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ा है. कासिम नाम के एक व्यक्ति ने इस अस्पताल में ईको टेक्निशियन के तौर पर काम किया तथा इस्तीफा दे दिया.
गुजरात पुलिस की एसआईटी ने अब कासिम को गिरफ्तार कर कहा है कि वह अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर यहूदी धर्म की एक अहमदाबाद स्थित संस्था में उग्रवादी घटना को अंजाम दिए जाने की साजिश रच रहा था. कांग्रेस ने कहा कि उग्रवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से खिलवाड़ कदापि मंजूर नहीं हो सकता, चाहे खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर ही आसीन क्यों न हो. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी व पटेल ने स्वयं आगे बढ़कर कहा है कि उग्रवादियों के खिलाफ गुजरात एटीएस द्वारा कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए तथा हम इसके पक्षधर हैं.'
उन्होंने कहा, आज प्रश्न यह है कि हार का मुंह देख रही निरुत्साहित भाजपा और उनके विफल मुख्यमंत्री अब राजनीति की सभी मर्यादाओं को तोड़ कर इतना नीचे गिर जाएंगे कि राष्ट्रय सुरक्षा के मामलों को भी झूठे आक्षेपों के सहारे अपनी सस्ती व ओछी राजनैतिक आकांक्षापूर्ति का माध्यम बना डालेंगे.
गौर हो कि रूपाणी ने कहा था कि ये आतंकवादी अस्पताल के नियमित कर्मचारी थे. इतना ही नहीं दो दिन पहले ही अस्पताल प्रशासन ने उन दोनों से इस्तीफा ले लिया था. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वो पटेल से इस्तीफा लें.
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने पटेल से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कल आरोप लगाया था कि हाल ही में गिरफ्तार किया गया आतंकी संगठन आईएसआईएस का एक संदिग्ध सदस्य उस अस्पताल में काम करता था, जहां पटेल पहले एक ट्रस्टी थे.
हालांकि, पटेल ने आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताकर कल ही खारिज कर दिया और भाजपा से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण ना करने तथा गुजरात के शांति प्रिय लोगों को नहीं बांटने की अपील की थी.
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, साढे़ छह करोड़ गुजरातियों द्वारा नकार दिए जाने से व्यथित एवं गुजरात चुनाव में आसन्न हार देख भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ओछे हथकंडों, षड्यंत्रकारी हरकतों व ऊलजलूल बयानबाजी पर उतर आए हैं.
गुजरात के चुनाव में कामयाबी पाने के लिए भाजपा नेता नित नया स्वांग व प्रपंच रच रहे हैं. उन्होंने कहा, कल देर रात भाजपा नेतृत्व एवं गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल के बारे में बौखलाहट भरे षड्यंत्रकारी आक्षेप लगाने का कुत्सित प्रयास किया गया. जो यह दर्शाता है कि निकम्मी व नाकारा भाजपा सरकार का मुखिया हार के डर से राजनीतिक ओछेपन के किस निम्न स्तर तक गिर सकता है.’’
सुरजेवाला ने कहा, सच्चाई जगजाहिर है. अंकलेश्वर, जिला भरुच में बना सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल एक ट्रस्ट द्वारा संचालित चैरिटेबल अस्पताल है. यह अस्पताल ग्रामीण अंचल में गुजरात के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है. उन्होंने कहा, अहमद पटेल या उनके परिवार का कोई सदस्य न तो अस्पताल का संचालन करने वाली ट्रस्ट का सदस्य है और न ही अस्पताल के प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ा है. कासिम नाम के एक व्यक्ति ने इस अस्पताल में ईको टेक्निशियन के तौर पर काम किया तथा इस्तीफा दे दिया.
गुजरात पुलिस की एसआईटी ने अब कासिम को गिरफ्तार कर कहा है कि वह अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर यहूदी धर्म की एक अहमदाबाद स्थित संस्था में उग्रवादी घटना को अंजाम दिए जाने की साजिश रच रहा था. कांग्रेस ने कहा कि उग्रवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से खिलवाड़ कदापि मंजूर नहीं हो सकता, चाहे खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के पद पर ही आसीन क्यों न हो. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी व पटेल ने स्वयं आगे बढ़कर कहा है कि उग्रवादियों के खिलाफ गुजरात एटीएस द्वारा कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए तथा हम इसके पक्षधर हैं.'
उन्होंने कहा, आज प्रश्न यह है कि हार का मुंह देख रही निरुत्साहित भाजपा और उनके विफल मुख्यमंत्री अब राजनीति की सभी मर्यादाओं को तोड़ कर इतना नीचे गिर जाएंगे कि राष्ट्रय सुरक्षा के मामलों को भी झूठे आक्षेपों के सहारे अपनी सस्ती व ओछी राजनैतिक आकांक्षापूर्ति का माध्यम बना डालेंगे.
गौर हो कि रूपाणी ने कहा था कि ये आतंकवादी अस्पताल के नियमित कर्मचारी थे. इतना ही नहीं दो दिन पहले ही अस्पताल प्रशासन ने उन दोनों से इस्तीफा ले लिया था. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वो पटेल से इस्तीफा लें.

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