हम उन महान विभूतियों के वंशज है जिनकी कर्म स्थली हमारा महान भारतवर्ष रहा है   

व्ही एस भुल्ले

म.प्र. शिवपुरी- अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार स्वराज के मुख्य संयोजक आज दतिया व भिण्ड जिले में बच्चे के बीच, समृद्ध खुशहाल जीवन के गुर सीखने पहुंचे। जहां माध्यमिक एवं हाईस्कूल की छात्र-छात्राओं ने अपने अबोध व निशछल भाव से समृद्ध, खुशहाल जीवन निर्वहन हेतु अपने विचारों को साझा किया। छात्र-छात्राओं जहां समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिये आपसी प्रेम भाई चारा, अनुशासन बड़ों का सम्मान, दया पूर्ण एवं अहिंसक कार्य व्यवहार के साथ कत्र्तव्य जबावदेही को अहम बताया। 
             वहीं स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने संंकलित विचारों के आधार पर भारत की महान विरासत, संस्कृति, शिक्षा को अहम बताया जो समृद्ध खुशहाल जीवन के मूल आधार है। उन्होंने कहा कि आज हर भारत वासी को इस बात पर गर्व होना चाहिए। कि वह उन विभूतियों के वंशज और उस महान भू-भाग भारतवर्ष के नागरिक है। जहां कई महान चमत्कारिक, विधा, विभूतियों ने जन्म लिया। और हमारा महान भारतवर्ष उन महान विभूतियों का कर्म स्थली रहा, जिन्होंने अपने कत्र्तव्य एवं जबावदेहियों के निर्वहन में एक से एक महान मानवता तथा इन्सानियत की मिशाले कायम की। 
             चर्चा के दौरान विल्सन पब्लिक स्कूल सेवढ़ा दतिया की छात्रा बुलबुल श्रीवास्तव, एन्जल तोमर, ज्योति, अनुभा, हंसिका, शिवानी, अर्पणा, खुशी, अनंप एवं छात्र इशान्त, विवेक, वेदान्स, अंश के अलावा लहार भिंण्ड माध्यमिक कन्या स्कूल की छात्रा शिवानी पुरोहित, तपोसुम खान, रुखमणी, सुरभी इत्यादि ने भाग लिया।  
              इस मौके पर स्कूल संचालक एवं शिक्षक भी मौजूद थे

      गर खबर सच है तो यह देश के प्रधानमंत्री जी का क्रान्तिकारी कदम होगा जो सन 1942 के भारत छोड़ों आन्दोलन की तरह ही खुशहाल समृद्ध शक्तिशाली राष्ट्र की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। मगर तरीका लोकतांत्रिक और विधि सम्मबत हो, जो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्भव है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली भारत निर्माण समिति या परिषद के माध्यम से जिसके तहत हर मंत्रालय में सलाहकार विशेष कत्र्तव्य अधिकारी रखने का अधिकार मंत्री व सरकार को होता है। 
          आत्म र्निभरता ही सबसे बड़ा मान-सम्मान स्वाभिमान है, जो आत्म सम्मान को जिन्दा रखता है जो उसे एहसास और अनुभूति भी कराता है। बैसे भी प्रधानमंत्री जी का अन्तिम लक्ष्य होना चाहिए कि लोकतांत्रिक तरीके से जिन आशा, आकांक्षाओं को लेकर वह दिन रात एक किये है अगर वह खबर अनुसार खुल दिल से वह यह क्रान्तिकारी बदलाव करने में सफल रहे, तो कोई ताकत नहीं, जो भारतवर्ष को समृद्ध, शक्तिशाली, खुशहाल बनने से रोक सके।