सड़कें मोदी के डिवेलपमेंट विजन के केंद्र में हैं क्योंकि इनका बहुआयामी असर होता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरह मोदी सड़कों के जरिए देश को बदलने की आशा करते हैं।
1999 में वाजपेयी ने स्वर्णिम चतुर्भुज हाइवे प्रॉजेक्ट की नींव रखी थी, जिससे दिल्ली, मुंबई, चेन्नैई और कोलकाता को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। यह भारत का सबसे बड़ा रोड प्रॉजेक्ट था। वाजपेयी ने उस समय कहा था, 'नैशनल हाइवे डिवेलपमेंट प्रॉजेक्ट के तहत हम जो हाइवे बना रहे हैं वे सिर्फ हाइवे नहीं बल्कि देश के हाथ की भाग्य रेखाएं हैं।' वास्तव में स्वर्णिम चतुर्भुज प्रॉजेक्ट बाद में भारत के तेज विकास में सहायक साबित हुआ।
मोदी को यह अहसास हुआ होगा कि ट्रांसपोर्ट इंन्फ्रस्ट्रक्चर में निवेश की वाजपेयी की बुद्धिमता अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अचूक रास्ता है।
ताजा सड़क निवेश प्रोग्राम में भारतमाला योजना शामिल है, जिसमें 5.35 लाख करोड़ की लागत से 34,800 किमी हाइवे का निर्माण किया जाएगा। रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे मिनिस्ट्री देश में 9000 किमी लंबी इकनॉमिक कॉरिडोर बनाएगी। इसमें 6000 किमी लंबी इंटर कॉरिडोर, 2000 किमी फीडर रूट्स, 2000 किमी बॉर्डर और इंटरनैशनल कनेक्टिविटी रोड भी शामिल है।
सरकार भारतमाला प्रॉजेक्ट के लिए मार्केट से लोन लेकर, सेंट्रल रोड फंड्स और बजटीय आवंटन से फंड मुहैया कराएगी। ऐसे समय में जब मोदी घटती नौकरियों, सुस्त ग्रोथ और छोटे कारोबारियों पर जीएसटी के नकारात्मक प्रभावों की वजह से दबाव में हैं, यह महत्वाकांक्षी योजना उनके लिए चमकदार हो सकती है।

Post a Comment