अभी इस तरह की व्यवस्था देश के किसी शहर में लागू नहीं है। ई-चालान तो घर पहुंचता है, लेकिन यह मैन्युअल तरीके से जनरेट होता है। इसमें कंट्रोल रूम में ट्रैफिक पुलिस के जवान कैमरा देखकर चालानी कार्रवाई करते हैं। बीएससीडीसीएल की आईटीएमएस व्यवस्था के तहत सब कुछ ऑटोमैटिक हो जाएगा। हाई रेजोल्यूशन कैमरों और सॉफ्टवेयर की मदद से वाहन चालक का सिर और गाड़ी की नंबर प्लेट एक साथ डिटेक्ट हो जाती है।
बिना हेलमेट वाले सिर की पहचान कर सिस्टम चालान जनरेट कर देगा। इस सिस्टम को वीडियोनेटिक्स ने टेक्नोसिस सिस्टम्स दिल्ली के लिए डेवलप किया है। टेक्नोसिस सिस्टम्स बीएससीडीसीएल के लिए भोपाल में आईटीएमएस का काम करेगी। इस सिस्टम का मंगलवार को टेक्नोसिस सिस्टम्स ने शहर के प्रमुख चौराहों पर प्रदर्शन कर दिखाया गया।
पहले फेस में 14 चौराहे और 7 प्रमुख सड़कों पर लागू होगी व्यवस्था
आईटीएमएस के पहले फेस में 14 चैराहों और 7 प्रमुख सड़कों पर व्यवस्था लागू होगी। इनमें बोर्ड ऑफिस चौराहा, रोशनपुरा चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, बागसेवनिया थाना के पास, पिपलानी चौराहा, गणेश मंदिर होशंगाबाद रोड, रेतघाट, वीआईपी रोड, एयरपोर्ट रोड, नई जेल रोड आदि पर व्यवस्था लागू होगी। इस व्यवस्था के लागू होने पर लोगों में हेलमेट पहनने की आदत बन जाएगी। बिना हेलमेट के होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
मेड इन इंडिया तकनीक ऐसे करेगी काम
कैमरे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिक्गनाइजेशन (एएनपीआर) सिस्टम और कम्प्यूटर विजन एंड पैटर्न रिक्गनाइजेशन सिस्टम से लैस होंगे। इसके मार्फत आईटीएमएस सर्वर से नियम तोड़ने वाले वाहन की जानकारी आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को भेज दी जाएगी। इसके लिए इन दोनों विभागों के सर्वर आईटीएमएस से लिंक रहेंगे। आईटीएमएस में तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालक कैमरे को धोखा नहीं दे सकेंगे। सिर पर कपड़ा बांधकर टोपी लगाकर, बिना आईएसआई मार्क का हेलमेट पहनकर, आधे सिर पर हेलमेट लगाकर, हेलमेट को हाथ या गाड़ी पर टांगकर या फिर सिर मुड़ाकर धोखा नहीं दिया जा सकेगा। इन्हें भी कैमरा डिटेक्ट कर लेगा।
इन नियमों को तोड़ने पर भी होगी कार्रवाई
- लाल लाइट होने पर भी चैराहा क्रॉस करने
- जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन रोकने
- चैराहे पर निर्धारित सीमा से आगे वाहन रोकने पर
- तय गति सीमा से तेज वाहन चलाने पर

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