तुम डाल-डाल ,हम पात-पात- सत्ता सुख पाने कैडरबेस भाजपा में भी कार्यकत्र्ताओं के बीचअंतरद्वंद

मंथनन्यूज शिवपुरी ! 

मध्यप्रदेश में चुनाव को लगभग 1 वर्ष से ज्यादा का समय शेष है सभी राजनैतिक पार्टियों  के कार्यकर्ताओं ने चुनाव में उतरने के सपने के साथ अपनी अपनी इच्छाओं जहां उन्हें चुनाव जीतने की उम्मीदें बरकरार है तैयारियों का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है
कांग्रेस और BJP के  सभी कार्यकर्ता अपनी इच्छा की सीटों पर जोर आजमाईस से जुट चुके हैं  और दबे स्वर में आपस में संगठित न रहते हुए एक दुसरे के विरोध में जुटे है! कांग्रेस को  सत्ता में ना रहते हुए लगभग 15 साल से ज्यादा का समय व्यतीत हो चुका है  शिवपुरी जिले की तीन विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। और भाजपा पार्टी संगठन  शिवपुरी की पॉचो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना चाहती है । भाजप में सत्ता के चलते कार्यकर्ताओं की भीड़ और एक दूसरे का मनोबल तोड़ने की कार्यशैली  हावी हो रही है ।जिसमें सबसे ज्यादा स्थिति शिवपुरी जिले के कोलारस तहसील में ज्यादा देखने को मिल रही है। विधायक पद के उम्मीदवार वहां पर जोर शोर से जु़टे हुए हैं शिवपुरी जिले की 3 विधानसभाओं पर कांग्रेस के  विधायक काविज है बस 2 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है जिसमें शिवपुरी जिले में  विधायक यशोधरा  राजे जो शिवराज कैबिनेट में मंत्री भी हैं और प्रहलाद भारती जो पोहरी से विधायक है यही दो विधायक भाजपा के है  । वहरहाल  शिवपुरी की वर्तमान हालत ठीक नहीं है क्योंकि यहां यशोधरा के प्रयास विफल हो रहे हैं और विकास की गति धीमी है क्योकि सिर्फ सिंध परियोजना और सिवरेज और सडको  की सियासत में यशोधरा  उलझी है  जनता तक उनका सम्वाद  कम है। पर शिवपुरी  विधायक मंत्री की सीट से भाजपा के विधायक प्रत्याशी  छेड़छाड़ करना नही चाहते । क्योंकि यहां पर मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया हैं  इसलिए ज्यादातर नेताओं की निगाह कोलारस सीट पर टीकी है जिसमें सुशील रघुवंशी जो भाजपा के जिलाध्यक्ष है पर भाजपा के प्रदेश  अध्यक्ष नंद कुमार चौहान ने जिलाध्यक्षों को टिकट देने के लिए पहले ही मना कर रखा है और देवेंद्र जैन जो पूर्व में कोलारस के विधायक रहे और लगभग 20 हजार से ज्यादा वोटों से हारे हुए प्रत्याशी भी  हैं ओर वीरेंद्र रघुवंशी जो  कांग्रेस से बीजेपी में लोकसभा चुनाव में शामिल हुए ।  कोलारस की तरफ रुख किया है खबर तो यह भी है प्रहलाद भारती जो पोहरी से विधायक है पर पोहरी में जीत के बाद ज्यादा विकास न कर पाने और विरोध शुरू होने के चलते कोलारस की सीट पर निगाहें जमा रहें है.  भाजपा के ज्यादा तर नेता कोलारस सीट पर मुंह ताकते नजर आ रहें है कोलारस विधायक बनने के सपने देखने वालो की लिस्ट लम्बी है यही कारण है भाजपा में दबे स्वर में ही सही भाजपा के समर्थक जो चुनाव के सपने बुन रहें. हैं वह सब  एक-दूसरे का विरोध करने में लगे हैं भाजपा की पार्टी जिसमें संगठन मजबूत है वहां कार्यकर्ताओं में विरोधाभास पैदा हो रहा है यह विरोधाभास आगे कितना उजागर होगा या कांग्रेस की तरह बीजेपी में विरोध के स्वरों की आवाज भोपाल तक गूंजेगी यह आने वाले चुनाव और वक्त ही बताएगा।