राज्य सूचना आयोग में एक अपील की सुनवाई करते हुए इसका खुलासा हुआ। आयोग ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोटिस थमाते हुए निर्देश दिए हैं कि फरवरी 2010 में उनके यहां कितने अधिकारियों-कर्मचारियों की अचल संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है, उसका प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
इसके पहले भी आयोग नगरीय विकास और जल संसाधन विभाग को ऐसे नोटिस दे चुका है। राजेश भास्कर ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारियों की अचल संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर नहीं होने को लेकर सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी।
विभाग ने जब जानकारी देने में आनाकानी की तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील कर दी। इसकी सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने विभाग को आदेश दिए कि 15 फरवरी 2010 में कितने अधिकारियों-कर्मचारियों की अचल संपत्ति का ब्योरा वेबसाइट पर है और कितनों का बाकी है, इसकी जानकारी मांगी है। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

Post a Comment