सिन्हा के इस तर्क से मौलाना बिदक गए। उन्होंने कहा कि तजिया निकालने से कोई प्रदूषण नहीं होता। राकेश सिन्हा ने जवाबी हमला बोलते हुए कहा कि बकरीद पर खून बहता है, उससे भी प्रदूषण होता है। हालांकि, यह रोक सिर्फ पटाखों की बिक्री पर लगी है, उसके इस्तेमाल पर नहीं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा पटाखा बिक्री के लिए दिए गए सभी नए और पुराने लाइसेंस रद्द कर दिए।
कोर्ट ने सितंबर में बैन हटाते हुए अपने आदेश में कहा था कि यह नवंबर से लागू होगा। साथ ही यह भी कहा था कि दिवाली के बाद बैन के प्रभाव से एयर क्वालिटी के बारे में भी पता लगेगा कि वहां कितना प्रदूषण का क्या स्तर रहता है। हर साल दिवाली पर दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, लिहाजा शहर में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया गया है।
नवंबर 2016 में तीन बच्चों ने कोर्ट में याचिका दी थी, जिसमें पटाखों की बिक्री पर बैन का आदेश कायम रखने के लिए कहा गया था। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने भी तब याचिका देने वालों का समर्थन किया था और बैन का फैसला कायम रखने पर बल दिया था। वायु प्रदूषण पर नजर रखने वाली केंद्र सरकार की एजेंसी ‘सफर’ (सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी ऐंड वेदर फॉरकास्टिंग ऐड रिसर्च) ने भी इसी महीने कहा था कि दिल्ली -एनसीआर में हवा की क्वॉलिटी खराब हो चुकी है जो दिवाली आते-आते और खराब होगी। एजेंसी ने कहा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक के खराब होने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

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