असली विकास है, गंदगी का निकास और स्वच्छता आसपास

मंथन
महात्मा गाँधी जी को सत् सत् नमन

स्वच्छता आस पास

स्वच्छता का पालन ईश्वर भक्ति के बराबर है यह महात्मा गांधी कहते थे। आज दो अक्तूबर यानी गांधी जयंती है, आज के दिन महात्मा गांधी के इस योगदान को याद करना सबसे जरूरी है। हम यह अक्सर कहते हैं कि गांधीजी ने हमें आजादी दिलाई, लेकिन गांधीजी सिर्फ आजाद भारत ही नहीं चाहते थे, वह एक स्वच्छ भारत भी चाहते थे। विदेशी गुलामी से आजादी तो हमें 70 साल पहले ही मिल गई, लेकिन देश को स्वच्छ बनाने का संकल्प अभी पूरा होना बाकी है। आज गांधी जयंती है, तो कुछ दिन बाद दिवाली है। जाहिर सी बात है कि अब तक आपके घरों में सफाई का काम भी शुरू हो चुका होगा। दिवाली में हम जिस तरह सफाई में जुटते हैं, आपने कभी सोचा है कि अगर साल भर ऐसी ही सफाई हम अपने घरों में और आसपास रखेंगे, तो दिवाली शायद हर रोज ही मना सकते हैं। 
हमारे लिए अक्सर सफाई का मतलब होता है, कचरे को अपने घर से बाहर निकाल देना, लेकिन यही काफी नहीं है, क्योंकि कचरा, आप ही की गली के बाहर एक ढेर में बदल जाता है और बीमारियों के जरिए हमारे घरों में फिर लौट आता है। आपको यह देखना और जानना जरूरी है कि आपके मोहल्ले में आने वाले सफाई कर्मचारी इस कचरे को रोज उठा रहे हैं या नहीं। और किसी कारणवश या उनके आलस की वजह से वे ये काम नहीं करते हैं, तो आप बेशक शिकायत दर्ज कीजिए, पर उनके इंतजार में हाथ पर हाथ धरके मत बैठिए कि वह आएगा, अभी आएगा, कभी तो आएगा ही। वह आए या न आए, लेकिन डेंगू, मलेरिया के मच्छर जरूर आएंगे। जिम्मेदारी सिर्फ उनके कंधों पर डाल देने से कुछ नहीं होगा। वे हमारे सहायक हैं, असली काम तो हमें खुद ही करना है।भारत के हम करोड़ों लोग हर साल में 6.2 करोड़ टन कचरा पैदा करते हैं। शहरों में रोज 30 लाख ट्रक, कचरे से लदे डंपिंग ग्राउंड में भेजे जाते हैं। यूं समझ लीजिए कि अगर इन ट्रकों को एक लाइन में खड़ा किया जाए, तो धरती से चांद की आधी दूरी तय हो जाएगीअगर सफाई आपके व्यवहार में आ गई, तो आपको कितने फायदे हो सकते हैं। लेकिन हां, ये व्यवहार अपनाएं, तो दिल से अपनाएं। किसी दिखावे के लिए नहीं।
स्वच्छता कोई बहुत बड़ा आंदोलन नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका है। क्या हमें अपने बच्चों को यह नहीं बताना चाहिए कि उन्हें किसी भी खाने की चीज को हाथ लगाने से पहले हाथ अच्छी तरह से धोने चाहिए।


.पूनम पुरोहित.शिवपुरी
9827565468