पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली - भारत और जापान के द्विपक्षीय रिश्तों में आई गर्माहट का असर कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। बुधवार को कैबिनेट ने दो ऐसे फैसलों पर मुहर लगाई है जो दोनो देशों के लिए आने वाले दिनों में काफी फायदे का सौदा साबित होगा।
इसमें एक फैसला एक लाख प्रशिक्षित भारतीय युवा कामगारों को जापान में काम करने का मौका देगा जबकि दूसरा फैसला एलएनजी के क्षेत्र में है। इसके तहत भारत उन देशों से एलएनजी ले सकेगा जहां से जापान खरीदता है जबकि जापान भारत को एलएनजी की आपूर्ति करने वाले देशों से इसे हासिल कर सकेगा। इससे दोनों देशों के लिए सस्ती दर पर और सुलभता से एलएनजी खरीदने का रास्ता खुल सकेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जापान के साथ टेक्नीकल इनटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीटीटीपी) समझौता करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके बारे में कौशल विकास, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इसके तहत एक लाख भारतीय युवाओं को तीन से पांच वर्षों के लिए जापान भेजा जाएगा। ये युवा भारत में भी स्किल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किये जाएंगे और जापान में भी इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये जापान में काम करने के साथ ही प्रशिक्षण भी हासिल करेंगे। जब ये भारत आएंगे तो अपने साथ एक बेहद कुशल अंतरराष्ट्रीय कार्य व्यवहार और औद्योगिक प्रशिक्षण ले कर आएंगे जिसका भारत में इस्तेमाल हो सकेगा।
जापान प्रशिक्षित युवा पेशेवरों की कमी से जूझ रहा है जबकि भारत में युवाओं की बड़ी फौज है। इस तरह से यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा। कैबिनेट ने भारत और जापान के बीच एक वैश्विक एलएनजी बाजार स्थापित करने से जुड़े समझौते के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखाई है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि अभी भारत और आस्ट्रेलिया के बीच एलएनजी खरीद समझौता है जबकि जापान और कतर के बीच भी इसी तरह का समझौता है। लेकिन आस्ट्रेलिया जापान के करीब है और कतर से भारत नजदीक है। नए समझौते के मुताबिक जरूरत पड़ने पर जापान भारत के हिस्से की एलएनजी आस्ट्रेलिया से खरीद सकेगा जबकि भारत इसी तर्ज पर जापान के हिस्से की एलएनजी कतर से ले सकेगा। इससे दोनों देशों के लिए एलएनजी आयात की लागत कम हो जाएगी।

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