राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डिप्टी कलेक्टर राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी है। इस समय इनके करीब 90 पद खाली हैं। इसकी वजह से राजस्व मामलों के निराकरण में वो गति नहीं मिल पा रही है, जिसकी अपेक्षा मुख्यमंत्री कर रहे हैं।
इसके मद्देनजर राजस्व विभाग ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख और सहायक भू-अभिलेख अधिकारियों के रिक्त पदों को संविदा के माध्यम से भरने के साथ डिप्टी कलेक्टर पद के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया है। बताया जा रहा है कि विभाग संभागीय स्तर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्ति देने जा रहा है। इसके लिए सूचियां तैयार हो चुकी हैं। दस साल का सेवा रिकॉर्ड देखने के बाद अंतिम फैसला होगा।
विभाग के प्रमुख सचिव अरुण पांडे का कहना है कि राजस्व प्रशासन के कई पद खाली हैं। इसका असर कामकाज पर भी पड़ता है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जब तक नियमित भर्तियां नहीं होती हैं, तब तक संविदा आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। डिप्टी कलेक्टर के खाली पदों को लेकर भी विचार किया जा रहा है।
तहसीलदार बनने आए सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टरों के आवेदन
सूत्रों का कहना है कि संविदा पर तहसीलदार बनने के लिए कुछ सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टरों ने भी आवेदन किए हैं। पदक्रम के हिसाब से देखा जाए तो डिप्टी कलेक्टर का पद तहसीलदार से ऊपर होता है। यही वजह है कि विभाग डिप्टी कलेक्टरों को इसमें लेने से हिचकिचा रहा है।

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