जीएसटी रिटर्न में प्रदेश के खराब होते प्रदर्शन से वाणिज्यिक कर विभाग के माथे पर भी चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं। सोमवार को राज्य के वाणिज्यिक कर आयुक्त ने कर सलाहकारों-वकीलों के साथ बैठक की और तेजी से रिटर्न जमा करवाने की अपील की। इधर सलाहकारों ने कहा है कि परेशानी गांव-कस्बों से आ रही है।
10 अक्टूबर को यदि जुलाई का जीएसटीआर-1 फॉर्म जमा नहीं हुआ तो लिंक 30 अक्टूबर तक बंद हो जाएगी। 30 अक्टूबर के बाद यदि कारोबारी फॉर्म जमा करेंगे तो उन्हें 200 रुपए रोज के हिसाब से पेनल्टी चुकाना होगी। साथ ही जीएसटीआर-1 जमा नहीं होने से अन्य व्यापारियों का भी नुकसान होगा। दरअसल व्यापारी को जीएसटीआर-1 में माल बेचने की जानकारी दाखिल करना है। व्यापारी यदि ये जानकारी नहीं देगा तो उससे माल खरीदने वालों व्यापारियों को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल सकेगी। ऐसे में एक व्यापारी अपने से जुड़े अन्य तमाम कारोबारियों के लिए भी परेशानी पैदा कर देगा। व्यापारी ठीकरा जीएसटी पोर्टल की सुस्त चाल पर फोड़ रहे हैं। हालांकि कमर्शियल टैक्स विभाग शिकायत को बहाना करार दे रहा है। विभाग के मुताबिक देश के तमाम राज्यों में पोर्टल अच्छे से चल रहा है तो फिर सिर्फ मप्र में ही परेशानी की शिकायतें क्यों आ रही है।
फिसड्डी नजर आ रहा प्रदेश
जीएसटी में व्यापारियों के माइग्रेशन के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया था। जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद प्रदेश फिसड्डी नजर आ रहा है। कर सलाकार आरएस गोयल के मुताबिक रिटर्न दाखिल करने के मामले में देश के कुल 31 राज्यों में मध्यप्रदेश 27वें स्थान पर है। सिर्फ जीएसटीआर-1 ही नहीं अगस्त और सितंबर के थ्री-बी फॉर्म जमा करने में भी प्रदेश की हालत खराब है। अगस्त के करीब 50 फीसदी थ्री-बी फॉर्म जमा हो सके हैं। जबकि सितंबर के 30 फीसदी थ्री-बी फॉर्म ही जमा हो सके हैं। विभाग सलाहकारों-वकीलों से मदद मांगी है। हमने विभाग को बताया है कि परेशानी खासतौर पर गांव-कस्बों से आ रही है।

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