मंथन ऩ्यूज शिवपुरी सशक्त पुलिसिंग ईमानदार छवि और अपनी विनम्रता के लिए प्रेदश भर में अलग पहचान रखने बाले आईपीएस सुनील कुमार पांडेय ने पीपुल्स समाचार से चर्चा करते हुए,महकमे में आने के बाद से अब तक के तमाम अनुभव साझा किए और बताया कि उनकी अभी तक की सर्विस में कई बार ऐसा भी हुआ है कि वह जिस बदमाश को टारगेट के तौर पर लेकर चल रहे हो और उसमे उन्हें जल्द सफलता हासिल न हुई हो,श्री पांडेय कहते है कि असफलता से कभी भी निराश नही होना चाहिये बल्कि असफलता के समय अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत रखना चाहिये,इच्छा शाक्ति मजबूत होने से प्लायनिंग भी हो जाती है और जिस कार्य को टारगेट के तौर पर लेकर कार्य कर रहे हो वह भी हो जाता है।*
*आईपीएस सुनील कुमार पांडेय से इस संबाददाता की हुई खास बातचीत के महत्वपूर्ण अंग।*
*प्रश्न:-*
आपने पुलिस विभाग में ही आना क्यों पसंद किया और कब आये।
*उत्तर:-*
में जब एम.ए. की पढ़ाई कर रहा था उस समय मेरे मन में विचार आया था कि पीड़ित मानवता की सेवा यूर्निफार्म के माध्यम से अच्छे से की जा सकती है,में पीड़ितों की मदद कर सकू इस उद्देश्य से पुलिस विभाग में आया हूँ
*प्रश्न:-*
पुलिस विभाग में आने के बाद किन किन पदों पर रहे है।
*उत्तर:-*
बर्ष 1994 में मेरा पुलिस विभाग में एसडीओपी के पद पर चयनित हुआ था,मेरी पहली पोस्टिंग दंतेबाड़ा में हुई थी इसके बाद में भिण्ड,रीबा, सतना, में भी पदस्थ रहा हूँ,में ग्वालियर,टीकमगढ़ में एडिशनल एसपी रहा हूँ।मुझे बर्ष 2015 में आईपीएस अवार्ड होने के बाद में जिला श्योपुर में पदस्थ रहने के अलाबा ईओडब्ल्यू में भी 1 बर्ष रहा हूँ।
यहाँ बतादे की सुनील कुमार पांडेय को सशक्त पुलिसिंग,ईमानदार छवि के अलाबा विनम्रता के लिए भी प्रदेश भर में जाना जाता है और यही कारण रहा की श्री पांडेय को बर्ष 2015 में आईपीएस अवॉर्ड होने के बाद में भी उन्हें 2009 का बैच मिला।
*प्रश्न:-*
अभी तक की सर्विस में कोई ऐसे पल जो आपको अक्सर याद आते हो और उन्हें आमजन ने भी सराहा हो।
*उत्तर:-*
मुझे आईपीएस अवार्ड होने के बाद पहली पोस्टिंग श्योपुर में मिली थी जब मैंने वह ज्वॉइन किया तो मालूम चला की एक लिस्टेड डकैत भरोसे मलहा सन 19854-85 से फरार चला आ रहा है और इस डकैत पर राज्यस्थान सरकार की ओर से 5 हजार व मध्यप्रदेश सरकार की ओर से 30 हजार रूपए का इनाम घोषित है।
पदस्थी के बाद से ही मैंने इस डकैत को पकड़ने के प्रयास शुरू कर दिए थे लेकिन डकैत भरोसे मलहा चालक था और वह मध्यप्रदेश व राज्यस्थान में आतंक का पर्याय बन चुका था,ग्रामीणों में भी उसका भय साफ़ दिखाई देता था,उसे पुलिस के मूमेंट की जानकारी लग जाती थी और वह राज्यस्थान मध्यप्रदेश वार्डर पर गाँव के समीप स्थित नदी के सहारे भाग जाने में सफल रहता था।
भरोसे मलहा इतना चालक था की हमारे पास सटीक सूचना होने के बाद भी वह हमे लगभग 8 बार चकमा देकर भाग जाने में सफल रहा।
इन असफलताओं के बाद श्री पांडेय ने अपना एक अलग नेटवर्क खड़ा किया और जिसका सुखद परिणाम ये सामने आया की श्री पांडेय को उक्त डकैत की हर गतिविधि की जानकारी मिलने लगी।
वर्तमान में शिवपुरी एसपी के तौर पर कार्य कर रहे सुनील कुमार पांडेय बताते है कि उन्हें आज भी वह दिन याद है जब उन्हें भरोसे मलहा के बारे में सूचना मिली थी की वह बीरपुर के जंगल में देखा गया है और इस सूचना पर से ही उन्होंने भरोसे मलहा को एक एन्काउंटर में ढेर कर कर दिया था।
*प्रश्न:-*
पहले से अब अपराधों की प्रवर्ति बदली है जिस कारण नई चुनोतियाँ भी सामने है,ऐसे मामलों में कैसे निपटते है।
*उत्तर:-*
सायवर क्राईम और धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ गए है।
आधुनिकी करण पर जोर दिया जा रहा है,पुलिस में ज्यादा पढ़े लिखे लोग आये है और जनता भी जागरूक है,पुलिसिंग में हमेशा सख्त,व्यवहार में कठोरता नही बल्कि विनम्रता होनी चाहिये,कानून सब के लिए एक है।
*प्रश्न:-*
कभी कभी बड़े घटनाक्रमों में पुलिस बल कम होने की कमी खलती है,ऐसी स्थितियों से कैसे निपटा जाता है।
*उत्तर:-*
प्रबंधन देखना पड़ता है,इच्छा शाक्ति हो तो सब ठीक हो जाता है।
*प्रश्न:-*
शिवपुरी में बड़े पैमाने पर पशू तश्करी होती रही है यहां तक की अन्य राज्यों के बाहन भी जिले की सीमा से बेखोफ अंदाज में निकलते थे।
दीगर राज्यों के पशू तस्करों का बड़ा समूह शिवपुरी में सक्रिय था इस पूरे रैकिट को आपने किस तरह ध्वस्त किया है।
*उत्तर:-*
मजबूत इच्छा शाक्ति से किया गया कोई भी कार्य अपूर्ण नही होता,इच्छा शाक्ति होनी चाहिये,इच्छा शाक्ति हो तो प्लायनिंग भी हो जाती है और काम भी हो जाते है।
*प्रश्न:-*
शिवपुरी में आपकी पदस्थी के बाद क्राईम ग्राफ में भारी गिरावट आई है।
*उत्तर:-*
जनसंवाद के माध्यम से आम जनता के साथ मिलकर अपराधो पर अंकुश लगाया है,थाना स्तर पर भी शिविरों का आयोजन किया जा रहा है जिससे जिससे आमजन अपनी परेशानियों के अलाबा बदमासों की गतिविधियां भी हमारे सामने रख सकें।

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