सुनील गावस्‍कर नाराज, बोले सीएसी की क्‍या जरूरत, कोहली खुद ही चुन लें कोच

नई दिल्‍ली : टीम इंडिया के मुख्‍य कोच पद से अनिल कुंबले के इस्‍तीफा के बाद अब नया कोच कौन होगा, इस पर अलग-अलग नामों पर कयास लगाए जा रहे हैं. इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान सुनील गावस्कर ने कहा है कि अगर कप्तान की ही पसंद इतनी मायने रखती है तो फिर क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) की क्‍या जरूरत है

नए कोच की जिम्‍मेदारी सीएसी पर

आपको बता दें कि बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण हैं और इन्हीं पर नए कोच का चुनाव करने की ज़िम्मेदारी है. लंदन में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान इन तीनों ने कोहली और कुंबले से मुलाकात की थी. मुलाकात के बाद तीनों ने अनिल कुंबले को ही टीम का कोच बनाए रखने का सुझाव दिया था. लेकिन सीएसी की बात को विराट कोहली ने नकार दिया.

...इससे काफी लोगों का समय बचेगा

कोहली के इस रवैये से सुनील गावस्कर काफी नाराज हुए. उन्‍होंने इतना तक कह दिया कि जब टीम के कप्तान की पसंद से ही कोच चुना जाना है तो फिर सीएसी की जरूरत क्‍या है. वेस्टइंडीज दौरे पर गए खिलाडि़यों और कप्तान कोहली से पूछ लें कि वे किसे कोच चाहते हैं. इससे काफी लोगों का समय बचेगा.

कुंबले के पक्ष में दिया बयान

इससे पहले भी गावस्‍कर अनिल कुंबले के पक्ष में बयान दे चुके हैं, उन्‍होंने कुंबले के इस्‍तीफे को भारतीय क्रिकेट का सबसे खराब दिन बताते हुए कहा था कि पिछले एक साल से कुंबले बतौर टीम कोच अपनी जिम्‍मेदारी अच्‍छे से निभा रहे थे. जब से कुंबले ने बतौर कोच टीम की कमान संभाली तब से भारतीय टीम ने अधिकतर मुकाबलों में जीत दर्ज की है.

उन्‍होंने कुंबले को भी सुझाव देते हुए कहा था कि उनहें सीएसी से इस बारे में बात करनी चाहिए थी. मुझे उम्‍मीद है कि वह सीएसी को अपने विश्‍वास में लेने में कामयाब होते और पहले से ज्‍यादा मजबूती के साथ कोच के पद पर बने रहते.

कुंबले ने मंगलवार को दिया इस्तीफा

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले ने कप्तान विराट कोहली के साथ कथित बहुचचर्ति मतभेदों के बीच मंगलवार को अपना पद छोड़ दिया और इस तरह से उनके सफल कार्यकाल का कड़वा अंत हुआ. कुंबले ने बीसीसीआई को अपने फैसले से अवगत कराया जिसने बाद में संक्षिप्त बयान में इस पूर्व कप्तान के त्याग पत्र की पुष्टि की. उनका एक साल का अनुबंध चैंपियन्स ट्राफी के साथ ही समाप्त हो गया था लेकिन उन्हें शुक्रवार से शुरू हो रही सीमित ओवरों की श्रृंखला के लिये टीम के साथ वेस्टइंडीज दौरे पर जाने का विकल्प दिया गया था. अनिल कुंबले ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्‍य कोच पद से इस्तीफा दे दिया है. कोच के रूप में 20 जून को उनका आखिरी दिन था. उन्‍हें पिछले साल नियुक्‍त किया गया था और उनका कार्यकाल एक साल का था. टीम इंडिया के कोच और कप्तान विराट कोहली के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी.

प्रदर्शन के मामले में दमदार रहे अनिल कुंबले

जहां तक अनिल कुंबले के प्रदर्शन की बात है तो इसमें उनका रिकॉर्ड खासा बेहतर रहा है. कुंबले के कोच रहते हुए भारत ने घरेलू टेस्‍ट मैचों में जबरदस्‍त प्रदर्शन किया और न्‍यूजीलैंड, इंग्‍लैंड, बांग्‍लादेश और ऑस्‍ट्रेलिया को हराया. साथ ही न्‍यूजीलैंड और इंग्‍लैंड को वनडे सीरीज में मात दी. हालांकि चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया को फाइनल में पाकिस्‍तान के हाथों हार का सामना करना पड़ा.टीम इंडिया ने कुंबले के कोच रहते हुए अच्छा प्रदर्शन किया. उसने वेस्ट इंडीज के खिलाफ उसकी सरजमीं पर 2-0 से श्रृंखला जीती और उसके बाद न्यूजीलैंड को 3-0 से, इंग्लैंड को 4-0 से तो बांग्लादेश को 1-0 और ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से घरेलू श्रृंखला में हराया. टीम ने इस पूर्व कप्तान के कार्यकाल के दौरान 8 वनडे जीते और 5 गंवाए.

रविवार को ही कुंबले का कॉट्रैक्ट खत्म हुआ था 

चैंपियंस ट्रॉफी के बाद अनिल कुंबले का बतौर कोच कार्यकाल खत्म हो रहा था, जिसे बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज दौरे तक बढ़ा दिया था. 25 मई को इस कोच पद के लिए आवेदन मांगे गए थे. कोच के लिए बीसीसीआई के मंगाए आवेदनों में कुंबले को सीधे एंट्री मिली थी. पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी इस दौड़ में शामिल हैं.

बोर्ड में कोई नहीं था कुंबले का साथ देने वाला

कुंबले की जाने की एक वजह उनका बोर्ड में कोई तरफदार न होना भी बताया जा रहा है. कुंबले का सिलेक्शन सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण ने किया था लेकिन इसके बाद कुंबले को बोर्ड में सपोर्ट करने वाला कोई नहीं था. ऐसे मौके कम ही आए थे जब बोर्ड में कोई कुंबले के सपोर्ट में खुलकर सामने आया