मंथन न्यूज़ जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के संबंध में वर्ष 2008 के चुनाव का फैसला 2017 में लिया गया जिसमें पेड न्यूज के संबंध में एक भी साक्ष्य नहीं है। मंत्री डॉ. मिश्र के लिए हाईकोर्ट जाने का रास्ता साफ हो गया है। जहाँ तक चुनाव विशेषज्ञों की राय है उनका कहना है कि जो लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वर्ष 2013 में दुबारा चुनाव जीत चुके हैं, यह फैसला भूतदर्शी अर्थात रेट्रोस्पेक्टिव है। इस फैसले में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं की अनदेखी की गई है।
ऐसा प्रत्याशी जो चुनाव हार गया और उसे जनता ने नकार दिया, वो चुनाव आयोग के माध्यम से जीते हुए प्रतिनिधि को हटवाने का प्रयास करे और उसमें समर्थ हो तो यह राजनीतिक स्थिरता के लिए भी ठीक नहीं। यह जनोदश का अपमान भी है कि एक बहुमत से चुने गए जनप्रतिनिधि पर किसी किस्म की रोक लगाई जाए। इस तरह का फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के विरूद्ध न होकर संपूर्ण प्रजातंत्र व्यवस्था के लिए भी घातक है।

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