मंथन ऩ्यूज भोपाल। रेत ठेकेदार को राशि का भुगतान किए बगैर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरण को खत्म करने के मामले में इंदौर के तत्कालीन मुख्य वनसंरक्षक आरआर ओखंडियार और धार के डीएफओ गौरव चौधरी पर गाज गिर सकती है। शासन ने प्रधान मुख्य वनसंरक्षक से दोनों अफसरों को नोटिस देने को कहा है। वन विभाग के सचिव महेंद्र धाकड़ ने नोटिस देने के निर्देश मुख्यालय को दिए जाने की पुष्टि की है।
वन मुख्यालय नोटिस की तैयारी में जुट गया है। सूत्र बताते हैं कि इन अफसरों से एक हफ्ते में जवाब मांगा जाएगा। यदि वे जवाब में प्रकरण फोर्स क्लोज करने के तथ्यात्मक तर्क प्रस्तुत नहीं कर पाए तो दोनों पर कार्रवाई हो सकती है। ओखंडियार वर्तमान में लघु वनोपज संघ के औषधि प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सीईओ हैं। जबकि गौरव चौधरी डीएफओ हैं।
उल्लेखनीय है कि मनरेगा के तहत धार की ग्राम पंचायत बाग में पौधरोपण के लिए विभाग ने वर्ष 2013 में रेत खरीदी थी। ठेकेदार के 40 हजार रुपए अटक गए थे। इसकी शिकायत उसने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई थी। ठेकेदार को राशि का भुगतान किए बगैर 2015 में ये प्रकरण एकतरफा खत्म कर दिया गया। तब ओखंडियार इंदौर वृत्त के सीसीएफ और गौरव चौधरी धार के डीएफओ थे।
30 अप्रैल को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर रहे थे, तब ये मामला सामने आया और इंदौर कमिश्नर संजय दुबे ने मामले के लिए कार्ययोजना शाखा के पीसीसीएफ डॉ. एलके चौधरी को जिम्मेदार बताया था। 4 मई को शासन ने पीसीसीएफ डॉ. चौधरी को निलंबित कर दिया था। इस संबंध में एपीसीसीएफ (प्रशासन-एक) राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि शासन ने दोनों अफसरों को नोटिस देने को कहा है। हम जल्द ही नोटिस जारी कर रहे हैं।
डॉ. चौधरी ने मांगा 19 दिन का वेतन
उधर, इसी मामले में 19 दिन निलंबित रहे पीसीसीएफ (कार्य आयोजना) डॉ. एलके चौधरी ने निलंबन अवधि का वेतन मांगा है। वन मुख्यालय ने ये प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। सूत्र बताते हैं कि डॉ. चौधरी ने तर्क दिया है कि जब उनका निलंबन ही गलत हुआ था तो उन दिनों को कार्य दिवस मानते हुए वेतन दिया जाए। मुख्यालय ने भी डॉ. चौधरी के प्रकरण में स्पष्ट अभिमत मांगा है। ज्ञात हो कि डॉ. चौधरी अगस्त में रिटायर हो रहे हैं।

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