नोटबंदी के एक साल के बाद केंद्र सरकार आपके ऊपर एक और बम गिरा सकती है

 मंथन न्यूज़ - नोटबंदी के एक साल के बाद केंद्र सरकार आपके ऊपर एक और बम गिरा सकती है. फाइनेंस रेज़ोल्यूशन ऐंड डिपॉज़िट इंश्योरेंस बिल 2017 नाम का बिल आपके पैसों को बिना आपकी इजाज़त के ज़ीरो कर सकता है.
क्या है केंद्र सरकार का ये बिल -  खबर के मुताबिक, जून 2017 में केंद्र सरकार ने एफआरडीआई बिल को मंजूरी दी थी. सरकार इस शीतकालीन सत्र में इस बिल को लाने की तैयारी कर रही है. दोनों सदनों में पर्याप्त बहुमत के चलते इसके पास होने की भी पूरी संभावना है. वित्तमंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि सरकार नए कानून के तहत बैंको के लिए बेल-आउट की जगह बेल-इन का प्रावधान ला सकती है.
जिसमें फेल हो रहे बैंकों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए गए है. इसके तहत घाटा झेल रहा बैंक ग्राहक के फिक्स डिपॉज़िट को अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सकता है. बैंक आपके पैसे देने से मना कर सकता है. या कुछ सालों के लिए लॉक कर सकता है. मतलब अगर बैंक को घाटा हो तो वो कह सकता है कि वो आपको आपके फिक्स डिपॉज़िट का पैसा वापस नहीं देगा या तय समय के बाद देगा.
अभी क्या है नियम
आपको बता दें कि अभी सरकारी बैंकों में जमा आपका पैसा क्रेडिट गारंटी के चलते एक सीमा तक सुरक्षित रहता है. अगर बैंक पूरी तरह दीवालिया हो जाए तो भी आपको एक लाख रुपए वापस मिलेंगे. हालांकि रिज़र्व बैंक की नीतियों के चलते ऐसी स्थिति कभी नहीं आई है. कभी भी कोई बैंक दीवालिया होने की कगार पर पहुंचा है तो किसी बड़े बैंक ने उसे टेकओवर कर लिया है.
इस नए बिल के बाद ये स्थिती बदल सकती है. अगर ये बिल प्रभावी होता है तो बैंक ग्राहकों के पैसे से अपने घाटे को पूरा कर सकता है. इसके लिए उसे आपकी इजाज़त नहीं चाहिए होगी.
इस बिल के समर्थकों का कहना है कि 70 साल के इतिहास में सरकार ने बैंक डूबने पर डिपॉजिटर्स का पैसा डूबने नहीं दिया है. बैंक डिपॉजिट पर सोवेरन गारंटी होती है. इसलिए डिपॉजिटर्स को इस प्रस्ताव को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए. वहीं इस प्रस्ताव का विरोध होने के बाद सरकार ने भी कहा है कि वो इसकी समीक्षा करेगी