इस अजीब फैसले के साथ ही इसने भविष्य में फिर से विवाह न करने और किसी विवाह समारोह में नहीं जाने का फैसला भी किया है।
राजाराम कर्मयोगी नाम के इस व्यक्ति ने कोटा में श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान के नाम से संस्था चला रखी है जो कई तरह सामाजिक कार्य करती है। साल 2012 में इन्होंने 12 दिसंबर को ही 12.12.12 के योग से विवाह किया था और उस समय 12 संकल्प भी लिए थे।
अब इनका कहना है कि इनकी पत्नी अलका दुलारी इन 12 संकल्पों को निभाने में उनका पूरी तरह साथ नहीं दे रही है। राजाराम ने कोर्ट में पत्नी से अलग होने का आवेदन दिया है। इसके साथ ही उन्होंने एक सामुदायिक केन्द्र में कुछ साधुओं को बुलाकर तय किया कि एक अब पुतले के साथ जीवन बिताएंगे।
उन्होंने इस पुतले को माला पहनाई। पुतले का नाम पार्वती रखा गया है। राजाराम कहते हैं कि तलाक नहीं ले रहे, बस अलग होना चाहता है। पुतले के साथ रहने के फैसले पर उनका कहना है कि मैंने दोबारा विवाह नहीं करने का फैसला किया है और यह पुतला मुझे अपने सेवा कार्य करने से रोकेगा नहीं। मैंने किसी विवाह समारोह में नही जाने और किसी के लिए अपशब्द इस्तेमाल नहीं करने का प्रण भी लिया है।
राजाराम के इस निर्णय को उनक पत्नी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उनके अनुसार मैंने परिवार की इच्छा के खिलाफ विवाह किया था, क्योंकि राजाराम की शर्त थी कि वे विवाह के बांद संतान पैदा नहीं करेंगे। हालांकि वे उनका कहना है कि राजाराम चाहेंगे तो वे खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश करेगी

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