सिंधिया पर भाजपा का सियासी घेरा, पवैया ने संभाला मोर्चा

पूनम पुरोहित मंथन भोपाल  न्यूज़ -कांग्रेस भले से ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश में अपना चेहरा घोषित न कर रही हो,लेकिन भाजपा मान चुकी है कि उसका मुकाबला सिंधिया से ही है। इसी वजह से सिंधिया के आभामंडल को चोटिल करने का भाजपा कोई मौका नहीं गंवा रही है।
scindia jaibhan 21 12 2017इस काम में शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री और सिंधिया राजघराने के परंपरागत विरोधी जयभान सिंह पवैया प्राणपण से जुटे हुए हैं। पवैया सिंधिया की छवि पर जुबानी हमला करने का कोई भी मौका नहीं चूक रहे हैं।
सिंधिया ही क्यूं? दरअसल भाजपा यह मानती है मध्यप्रदेश कांग्रेस के तमाम क्षत्रपों में सिंधिया अकेले ऐसे शख्स है जो लंबी रेस के धावक हो सकते हैं। छवि, पृष्ठभूमि, आयु, राजनीतिक चातुर्य, भाषण शैली, स्वीकार्यता हर लिहाज से वे पार्टी में अपने प्रतिद्वंदियों के मुकाबले इक्‍कीस हैं।
ग्वालियर चंबल संभाग के साथ साथ मध्यभारत खासतौर पर मालवा निमाड अंचल में उनकी पहुंच पार्टी के दूसरे नेताओं के मुकाबले ज्यादा है। संयोग से यही इलाका भाजपा का भी 'होम पिच" है। फिर दो माह के भीतर मध्यप्रदेश में विधानसभा के दो उपचुनाव है।
मुंगावली और कोलारस, ये दोनो सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। इन उपचुनावों को लेकर भाजपा भीतर ही भीतर भयभीत है। भय का आलम यह है कि चुनाव का ऐलान होने से पहले ही भाजपा ने अपने मंत्रियों की फौज दोनो क्षेत्रों में उतार दी। मुख्यमंत्री भी दौरे पर दौरे कर रहे हैं।
भाजपा मानती है कि इन चुनावों में ज्योतिरादित्य सिंधिया उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं,लिहाजा राजनीतिक हमले उन्हीं पर केंद्रित हैं । हमले की जवाबदारी सूबे के उधा शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया के पास है जो राजघराने और महल का विरोध करते करते सांसद विधायक और मंत्री बन गए।
पवैया आए दिन सिंधिया के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं,लेकिन सिंधिया ने आज तक उनके किसी भी आरोप का जवाब न देकर दलीय राजनीतिक संघर्ष को एकतरफा वार में तब्दील कर दिया। कभी वे सिंधिया को चला हुआ कारतूस बताते हैं तो कभी उनका नाम लेकर उनसे हाथ मिलाने वालों को दस रुपए इनाम का ऑफर देकर सुर्खियां बंटोरते हैं।
सिंधिया का आभामंडल तोड़ने के लिए वे कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे। पिछले दिनों अशोकनगर के एक कार्यक्रम में पवैया ने पार्टी की यूथ विंग भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडे और अन्य पदाधिकारियों को मंच पर गंगाजल पिलाकर उनका मुख शुद्धिकरण किया और शपथ दिलायी कि वे कभी अपने मुंह से श्रीमंत या महाराज शब्द का उधाारण नहीं करेंगे।
ऐसी कोई सभा नहीं होती जिसमे पवैया जाए और सिंधिया के खिलाफ न बोलें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अटेर उपचुनाव में सिंधिया के खिलाफ कड़े शब्दों का प्रयोग किया था,लेकिन अभी वे संभलकर बोल रहे हैं। राज्यसभा सदस्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने भी बीच में सिंधिया के खिलाफ व्यक्तिगत आरोपों की झड़ी लगा दी थी।
इनका कहना है
जयभान सिंह पवैया सस्ती लोकप्रियता के लिए हल्के बयान देते रहते हैं। वे जानते हैं कि जब तक वे ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम नहीं लेंगे तब तक उनकी बातों को कोई तवज्जों नहीं देगा। इसलिए वे अक्सर खीज उतारते रहते हैं। मेरी तो उन्हें सलाह है कि वे अपने विभाग पर ध्यान रखें तभी उनका भला हो पाएगा। 
- पंकज चतुर्वेदी, प्रवक्ता मप्र कांग्रेस कमेटी
जयभान सिंह पवैया प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता है। वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामंतवादी और जनविरोधी रवैये के खिलाफ जो भी टिप्पणी कर रहे हैं वे उचित है । पार्टी उनकी बातों से सहमत है। 
 दीपक विजयवर्गीय, प्रवक्ता मप्र भाजपा