पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -अपने ग्राहकों से जुड़ी जानकारी को उनसे पूछे बगैर राजनीतिक दुरुपयोग के मामले पर दुनिया की सबसे मशहूर सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक की मुसीबत बढ़ती दिख रही है। एक तरफ कंपनी के खिलाफ अमेरिका और ब्रिटेन में जांच शुरु हो गई है तो दूसरी तरफ दूसरे सबसे बड़े बाजार भारत सरकार ने बेहद कड़ी चेतावनी दी है।
सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, अगर फेसबुक भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को भारत में सम्मन भेज कर बुलाने की भी धमकी दी है।
सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, अगर फेसबुक भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को भारत में सम्मन भेज कर बुलाने की भी धमकी दी है।
भारतीय आइटी मंत्री का यह सख्त रुख तब आया है जब अमेरिका में ग्राहकों के हितों की रक्षा से जुड़ी एजेंसी फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने फेसबुक के खिलाफ जांच शुरु की है कि क्या कंपनी ने अपने ग्राहकों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उनके आज्ञा के बगैर किसी दूसरी एजेंसी को दी है या नहीं।
कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग अमेरिकी कांग्रेस में भी उठी है। इसी तरह से ब्रिटेन और यूरोपीय कमीशन में भी फेसबुक के खिलाफ जांच शुरु हो गई है। यह जांच मीडिया में आइ उन रिपोर्टो के आधार पर शुरु की गई है जिसमें यह दावा किया गया है कि फेसबुक के पांच करोड़ ग्राहकों के डेटा से ली गई जानकारी का इस्तेमाल अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिताने के लिए किया गया है।
विवाद के केंद्र में ब्रिटेन की कैम्बि्रज एनालिटिका नाम की कंपनी है जिसे सूचनाओं के आधार पर आकलन करने के क्षेत्र में दुनिया की बेहतरीन कंपनियों में माना जाता है। इस खुलासे के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ के तमाम देशों में हड़कंप मच गया है। यह पहला मामला है जिसमें सोशल साइट्स के ग्राहकों की जानकारी के आकलन के आधार पर राजनीतिक फायदा उठाने की बात सामने आई है।
प्रसाद ने कहा कि, ''मैं यह बात स्पष्ट करता हूं कि भारत सरकार प्रेस की स्वतंत्रता, फेसबुक जैसे सोशल साइट्स पर विचारों व भावनाओं के आदान-प्रदान का समर्थन करती है। लेकिन अगर भारत की चुनावी प्रक्रिया को किसी गड़बड़ तरीके से प्रभावित करने की कोशिश होती है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जरुरी हुआ तो कठोरतम कार्रवाई की जा सकती है।
भारत में आइटी कानून के तहत तमाम ऐसे प्रावधान है जिसका इस्तेमाल इसके लिये किया जा सकता है। हम फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पूछताछ के लिए भारत भी बुला सकते हैं।'' प्रसाद से जब यह पूछा गया कि क्या फेसबुक के खिलाफ कोई जांच होगी तो उनका जवाब था कि भारत में इस क्षेत्र की नियामक एजेंसी दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआइ) है और अगर कोई खास शिकायत आती है तो ढांचागत तरीके से कदम उठाया जाएगा। अभी मैं सिर्फ यह चेतावनी देना चाहता हूं कि फेसबुक को भारतीय कानून को हल्के में नहीं लेना चाहिए। प्रसाद ने यह भी कहा है कि सोशल साइट्स के ग्राहकों के हितों की रक्षा को लेकर जो नियम कानून अभी है सरकार उनकी नए सिरे से समीक्षा करेगी।
भारतीय मंत्री की तरफ से दी गई इस चेतावनी का अपना महत्व है। तकरीबन 20 करोड़ भारतीय फेसबुक इस्तेमाल करते हैं और यह अमेरिका से बाहर कंपनी के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। अक्टूबर, 2015 में जुकरबर्ग ने भारत की यात्रा की थी और अपने टाउन हाल संबोधन में कहा था कि ''भारत के बगैर काम नहीं चलेगा।'' वैसे भारतीय नियामक एजेंसी टीआरएआइ और भारत सरकार के साथ फेसबुक का विवाद वर्ष 2016 में हुआ था जब इस कंपनी की फ्री बेसिक्स सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकार का कहना है था कि इससे सभी को समान तौर पर इंटरनेट देने की अवधारणा की अवहेलना हो रही है।
वाट्सएप के सह संस्थापक बोले, फेसबुक को डिलीट कर दीजिए
राजनीतिक उद्देश्यों के लिए फेसबुक उपभोक्ताओं के डाटा लीक की खबरों के बीच वाट्सएप के सह संस्थापक ब्रायन एक्टन ने यूजरों से फेसबुक को डिलीट करने के लिए कहा है। ब्रायन एक्टन ने ट्वीट कर अपने 23,000 से ज्यादा फॉलोअर से कहा कि यह फेसबुक को हटाने का समय है।
फेसबुक ने 2014 में वाट्सएप का अधिग्रहण कर लिया था। एक्टन ने जान कोउम के साथ मिलकर वाट्सएप की स्थापना की थी। कोउम अब भी कंपनी की अगुआई कर रहे हैं और फेसबुक के बोर्ड पर हैं। सीएनएन के मुताबिक, एक्टन के इस मैसेज के बाद देखते-ही-देखते बहुत सारे लोग डिलीट फेसबुक मुहिम से जुड़ गए और कई मीडिया आउटलेट पर फेसबुक अकाउंट डिलीट करने का तरीका बताया जाने लगा।

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