इन सबके बावजूद आज नगरपालिका परिषद ने अपनी तरफ से दोशियान को 15 दिन की अवधि दी और साथ ही अल्टीमेटम दिया कि यदि इस समय तक शहर में सिंध नदी का पानी वह नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ परिषद एफआईआर दर्ज कराएगी। हालांकि एफआईआर के लिए ठोस बजह चाहिए जो पालिका या प्रशासन के पास नहीं है। इस खींचतान में लोगों के हलक सूख रहे हैं और उन्हें वैकल्पिक स्त्रोतों से भी पानी मुहैया नहीं हो पा रहा। बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह ने कहा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है शहर में पेयजल संकट गंभीर रूप से गहराता जा रहा है और भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से टयूबवैल दम तोड़ रहे हैं, हवाई पट्टी स्थित हाईडेंट में यदि जल स्तर नीचे चला गया तो ऐसे में आशा सिर्फ सिंध के पानी की है। पालिका पदाधिकारियों ने एक स्वर से कहा कि 2011 में पूर्ण होने वाली यह योजना 7 साल बाद 2018 में भी पूर्ण नहीं हो पाई दोशियान के अधिकारियों यहां तक कहा गया कि वह भले ही गर्मी में घर-घर तक पानी नहीं दे पाएं, लेकिन बायपास पर तो पानी दे दें ताकि हम उस जल का परिवहन कर जनता को पेयजल संकट से निजात दिलाएं। पानी के लिए आत्मदाह की चेतावनी दे चुके वार्ड क्रमांक 4 की पार्षद वर्षा गुप्ता के पति पूर्व पार्षद संजय गुप्ता ने बैठक में दोशियान से गुस्साए लहजे में पूछा कि वह बताएं कि कब तक शहर में पानी सप्लाई करेंगे। पार्षद बलवीर यादव ने कहा कि कल यशोधरा राजे सिंधिया के समक्ष दोशियान ने शहर में पानी पहुंचाने के लिए 1 अप्रैल तक का समय मांगा है और उन्हें यह समय देना चाहिए, भाजपा पार्षदों ने दोशियान को समय देने की पैरवी की।
-उक्त खबर के समानान्तर खड़ा बॉक्स
फोटो रक्षित दोशी -
पानी न देने के तकनीकी आधार गिना कर सबको चुप कर दिया दोशियान ने-
हम समय सीमा नहीं बता सकते पर जल्द से जल्द पानी देंगे: रक्षित दोषी
-कहा जब सक्षम परमीशन नहीं थी पालिका के पास तो क्यों दिया ठेका
दोशियान के संचालक रक्षित दोषी ने अपनी बात तथ्यात्मक ढंग से संयमित लहजे का इस्तेमाल करते हुए रखी और पालिका को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं शिवपुरी वासियों के दर्द को समझ सकता हूं, क्योंकि जो योजना 2011 में खत्म होनी थी वह आज तक पूर्ण नहीं हो सकी, लेकिन इसमें हमारा दोष क्या है? कहा जा रहा है कि काम की गुणवत्ता खराब है, लेकिन मैं इससे असहमत हूं और परिषद यदि गुणवत्ता की जांच के लिए कोई तकनीकी टीम बनाती है तो हम उसका सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन जहां तक दोशियान पर एफआईआर कराने का सवाल है तो मेरा मानना है इससे हमारा मनोबल कमजोर होगा और काम में भी बिलंव होगा। जहां तक योजना में देरी का सवाल है तो वन विभाग की अनुमति न मिलने से योजना खटाई में पड़ गई थी और तीन साल पहले हमने भी अनुबंध समाप्त करने का निर्णय ले लिया था, लेकिन बाद में बढ़ी हुई दर देने में सहमति व्यक्त करने में हम फिर से अनुबंध में आए, लेकिन दो साल तक प्रोजेक्ट खटाई में पडऩे के कारण पाइप आदि सारा सामान लावारिस हालत में धूप, बरसात और ठंड सहन करता रहा। इसी का परिणाम है कि आज लगातार लीकेज हो रहे हैं। 30 किमी लंबी पाइप लाइन है और जिसमें 3 हजार ज्वॉइंट हैं। हमने अभी तक 200 प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं और हमारा अनुभव है कि पहले सीजन में इस तरह की दिक्कतें आती हैं जिस तरह की दिक्कतें इस प्रोजेक्ट में आ रही हैं। हम जानते हैं कि यदि गर्मी में हम शहर को पानी दे देंगे तो इससे हमारा मूल्य और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ेंगी और हम उस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन स्पष्ट आश्वासन कैसे दे दें। सिर्फ यह कह सकते हैं कि लीकेज ठीक करने के बाद 10 दिन में हम ट्रायल शो करेंगे। हमें कानूनी रूप से पानी देने के लिए अनुबंध की शर्तों के अनुसार बाध्य नहीं किया जा सकता। अनुबंध के अनुसार अधिसूचना जारी होने के 6 माह तक हम जल सप्लाई के लिए विवश नहीं है। अनुबंध में यह भी वर्णित है कि सभी अनुमति मिलने के बाद एक साल के भीतर हम पानी सप्लाई करेंगे जबकि अभी वन विभाग में स्पेस फीडर की अनुमति हमें नहीं मिली है इसके लिए नगरपालिका को 5 करोड़ 80 लाख रूपए वन विभाग में जमा कराने होंगे तब अनुमति मिलेगी। स्पेस फीडर न होने के कारण हम लगातार पेयजल सप्लाई करने में पावर ड्रिप के कारण असमर्थ हैं।
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नहीं बन सकी तकनीकी समिति
बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह ने स्वीकार किया योजना में इसलिए विलंब हुआ, क्योंकि नगरपालिका के पास कोई तकनीकी जानकार नहीं था इसलिए सिंध जलावर्धन योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनानी चाहिए, लेकिन बैठक में कोई तकनीकी समिति नहीं बनाई गई।

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