यूपी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार अरुण जेटली, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, विजय पाल तोमर, कांता कर्दम, अशोक वाजपेयी, हरनाथ यादव, सकलदीप राजभर और अनिल अग्रवाल ने जीत दर्ज की है. दूसरी वरियता की काउंटिंग ने अनिल अग्रवाल की जीत पर मोहर लगा दी.
सपा-बीएसपी गठबंधन की नींव उपचुनाव में सपा को समर्थन और राज्यसभा चुनाव में बीएसपी प्रत्याशी के लिए सपा की तरफ से वोटिंग को लेकर हुआ था. बीएसपी द्वारा समर्थन का जहां सपा को उपचुनाव में फायदा मिला वहीं बीएसपी को राज्यसभा चुनाव में सपा द्वारा कोई फायदा नहीं मिल सका. दरअसल बीजेपी को पता था कि यदि इस गठबंधन को यहीं नहीं रोका गया तो 2019 में उसकी राह आसान नहीं है. इसलिए पार्टी ने जिस दिन उपचुनाव में हार का सामना किया उसी दिन से राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर काम शुरू कर दिया.
दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती तक नतीजों को लाना
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की पूरी कोशिश थी कि किसी भी तरह बीएसपी के प्रत्याशी को पहली वरीयता के आधार पर ज्यादा वोट ना मिले और निर्णय दूसरी वरीयता के आधार पर वोटिंग तक जाए. क्योंकि उसे पता था कि पहली वरीयता के आधार पर बीएसपी को यदि ज्यादा वोट मिले तो उसकी जीत तय हो जाएगी.
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की पूरी कोशिश थी कि किसी भी तरह बीएसपी के प्रत्याशी को पहली वरीयता के आधार पर ज्यादा वोट ना मिले और निर्णय दूसरी वरीयता के आधार पर वोटिंग तक जाए. क्योंकि उसे पता था कि पहली वरीयता के आधार पर बीएसपी को यदि ज्यादा वोट मिले तो उसकी जीत तय हो जाएगी.
बता दें कि दूसरी वरीयता में अनिल अग्रवाल को 300 से ज्यादा वोट मिले. जबकि दूसरी वरीयता में बीएसपी प्रत्याशी को 1 वोट मिला था. वहीं पहली वरीयता में भीम राव अंबेडकर को मात्र 32 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी के अनिल अग्रवाल को पहली वरीयता में 16 वोट मिले थे.
नरेश अग्रवाल के आने का मिला फायदा
बीजेपी समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल को अपने पाले में लिया. इसका नतीजा यह रहा कि नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल का जो वोट सपा को या बीएसपी को मिलता वह बीजेपी के गया. नितिन अग्रवाल समाजवादी पार्टी से विधायक हैं. जबकि उनके पिता हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं. नरेश अग्रवाल सपा द्वारा राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी ना बनाए जाने के बाद अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बीजेपी का दाम थाम लिया था.
बीजेपी समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल को अपने पाले में लिया. इसका नतीजा यह रहा कि नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल का जो वोट सपा को या बीएसपी को मिलता वह बीजेपी के गया. नितिन अग्रवाल समाजवादी पार्टी से विधायक हैं. जबकि उनके पिता हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं. नरेश अग्रवाल सपा द्वारा राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी ना बनाए जाने के बाद अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बीजेपी का दाम थाम लिया था.
दो सपा-बीएसपी के विधायक नहीं दे सके वोट
चुनाव से ठीक पहले बीएसपी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी को हाईकोर्ट ने तगड़ा झटका दिया था. बांदा जेल में बंद बीएसपी के विधायक मुख्तार अंसारी और फिरोजाबाद जेल में बंद सपा के विधायक हरिओम यादव राज्यसभा चुनाव में वोट देने पर रोक लगा दी, जिससे दोनों पार्टियों का एक-एक वोट कम हो गया.
चुनाव से ठीक पहले बीएसपी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी को हाईकोर्ट ने तगड़ा झटका दिया था. बांदा जेल में बंद बीएसपी के विधायक मुख्तार अंसारी और फिरोजाबाद जेल में बंद सपा के विधायक हरिओम यादव राज्यसभा चुनाव में वोट देने पर रोक लगा दी, जिससे दोनों पार्टियों का एक-एक वोट कम हो गया.
बीएसपी विधायक की क्रॉस वोटिंग
राज्यसभा चुनाव में बीएसपी का रहा सहा खेल विधायक अनिल सिंह ने बिगाड़ दिया. बीएसपी विधायक अनिल सिंह ने बीजेपी के पक्ष में वोट करने की बात कैमरे के समाने कही. उन्होंने कहा कि मैंने बीजेपी को वोट दिया है. उन्होंने आगे कहा कि 'मैं योगी जी को वोट दे रहा हूं. मैंने अंतरात्मा की की आवाज पर वोट दिया.'
राज्यसभा चुनाव में बीएसपी का रहा सहा खेल विधायक अनिल सिंह ने बिगाड़ दिया. बीएसपी विधायक अनिल सिंह ने बीजेपी के पक्ष में वोट करने की बात कैमरे के समाने कही. उन्होंने कहा कि मैंने बीजेपी को वोट दिया है. उन्होंने आगे कहा कि 'मैं योगी जी को वोट दे रहा हूं. मैंने अंतरात्मा की की आवाज पर वोट दिया.'
निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी को किया वोट
निर्दलीय विधायक और समाजवादी पार्टी समर्थक रघुराज प्रताप सिंह द्वारा एसपी प्रत्याशी जया बच्चन को वोट देने के बाद निर्दलीय विधायक, निषाद पार्टी और सपा के ही एक विधायक ने बीजेपी के पक्ष में वोट देने की घोषणा की. इसके बाद निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने भी बीजेपी के पक्ष में मतदान किया.
निर्दलीय विधायक और समाजवादी पार्टी समर्थक रघुराज प्रताप सिंह द्वारा एसपी प्रत्याशी जया बच्चन को वोट देने के बाद निर्दलीय विधायक, निषाद पार्टी और सपा के ही एक विधायक ने बीजेपी के पक्ष में वोट देने की घोषणा की. इसके बाद निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने भी बीजेपी के पक्ष में मतदान किया.
उन्होंने कहा कि 'हम महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) के आदेश का पालन करने जा रहे हैं. महाराज जी हमारे अभिभावक हैं. यह अंतररात्मा की आवाज है. उनकी एक साल की कार्यशैली को देखते हुए हम उनके हाथों को मजबूत करने जा रहे हैं. बीजेपी की 9 सीटें पक्की हैं.' उधर, निषाद पार्टी के विधायक विजय मिश्रा ने भी बीजेपी के पक्ष में वोटिंग की.

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