संजय बेचैन के प्रयास से मिली बंधुआ बने परिवार को आजादी
*10 हजार के एवज में चार साल से आदिवासी परिवार पिस रहा था मजदूरी के शिकंजे में
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पूनम पुरोहित
जिस शिवपुरी जिले में मध्य प्रदेश शासन के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहरिया आदिवासियों की बेहतरी के लिए विशेष सहरिया सम्मेलन आयोजित कर मंच से उनके प्रति दया भाव दर्शाकर गए हों, विपक्षी दल कांग्रेस के प्रमुख नेता सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया आदिवासियों को अपने परिवार का सदस्य बताकर उनके हितार्थ व सम्मान के लिए कुछ भी कर गुजरने का भाषण देते हों उसी शिवपुरी में जबरन मजदूर बनकर जानवरों से भी बदतर गुलाम बने आदिवासी मुक्ति के लिए छटपटा रहे हों तो इसे आप क्या यही नहीं कहेंगे कि इन दोनों प्रमुख दलों को असल मे आदिवासियों के हित की कितनी चिंता है, कितना लगाव है।
जी हां यह गोपी और उसकी पत्नी सिया बाई की दुर्दशा देखकर पता लग जाता है जिसे सहरिया क्रांति संयोजक संजय बेचैन की सक्रियता एवं पुलिस की तत्परता से परिवार सहित जबरन मजदूरी से मुक्त तो करा लिया गया लेकिन आरोपियों को अभी कानूनी कार्यवाही के घेरे में पुलिस ने नहीं लिया है।
शिवपुरी के मनियर की रहने वाली गायत्री आदिवासी अपनी माँ सियाबाई के साथ सहरिया क्रांति संयोजक के निवास पर आई उसने आंखें नम करते हुए जो आपबीती सुनाई तो उसे सहरिया क्रांति संयोजक पुलिस अधीक्षक कार्यालय लेकर गए। सिया बाई ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य को आपबीती बताते हुए कहा कि आज से 4 साल पहले ग्राम छिरेंटा गाँव में सुग्रीव सरदार से अपने बेटे राजेश की शादी के लिए 10000 रुपए लिए थे। कर्जा चुकाने के लिए श्रम के अतिरिक्त कोई साधन नहीं था अत: उसने सरकारी मजदूरी दर पर उसके यहां मजदूरी करने का मौखिक अनुबंध किया लेकिन सुग्रीव ने घर के सभी सदस्यों को जबरन मजदूर बना लिया जिनमें सिया बाई का पति गोपी स्वयं सिया भाई उसका लड़का राजेश छोटा लड़का राधे और रीना उसके यहां बंधुआ मजदूर हो गए। लगातार 4 साल से सुग्रीव के यहां दिन रात काम कर रहे मगर 10000 रुपए चुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जब भी सिया बाई और गोपी सुग्रीव से मजदूरी का हिसाब करने का कहते तो वह कहता कि अभी तो ब्याज भी नहीं चुका पूरे पैसे लाओ तब तुम्हें जाने दूंगा। सिया बाई ने बताया कि सुग्रीव पूरे परिवार को अमानुषिक यातनायें देता है। इस पर उन्होंने मामले की गम्भीरता को समझते हुए तत्काल सिरसौद थाना प्रभारी सुरेश शर्मा को दूरभाष पर ही निर्देशित करते हुए इस पूरे परिवार को न्याय दिलाने की बात कही तथा पीडि़त सिया बाई को सिरसौद जाने को कहा। सिरसौद थाना से सियाबाई को लेकर थाना प्रभारी उक्त दबंग के फॉर्म हाउस पर पहुंचे और वहाँ से अपने ही वाहन में इस परिवार के गोपी, राधे, लक्ष्मी, रीना को लेकर आए और उनका सामान भी एक टैक्सी में लदवाया और उसे उसकी पुत्री गायत्री के यहां सकुशल छोड़ा। इस मामले में पुलिस ने मानवीयता का परिचय तो दिया लेकिन अभी तक कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई है वहीं सियाबाई ने आरोप लगाया है कि उसका एक बेटा राजेश छह सात माह से गायब कर दिया है और उसे कहीं उक्त दबंग ने ही बेच दिया है, उसे भी तत्काल मुक्त कराया जाए। इस पूरे परिवार के चेहरे पर अब खुशी के भाव देखे जा रहे हैं।
इनका कहना है-
इस मामले में अगर महिला लिखित शिकायत थाने पर देती है कार्यवाही की जाएगी फिलहाल उनको कृपाल सरदार के यहाँ से सकुशल उनके गाँव पहुंचा दिया गया है।
सुरेश शर्मा
थाना प्रभारी सिरसौद

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