नाबालिग बालिका से बलात्कार के आरोपी को 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा

मंथन न्यूज शिवपुरी
विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण )अधिनियम शिवपुरी श्री अरुण कुमार वर्मा ने नाबालिग बालिका के साथ बलात्कार के आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹13000 अर्थदंड की सजा से दंडित किया है !
अभियोजन की कहानी के अनुसार अभियुक्त धारा सिंह पुत्र महाराज सिंह कुशवाहा आयु 49 वर्ष ,निवासी -हाथीयान मोहल्ला नरवर, वार्ड क्रमांक -7 जिला- शिवपुरी नरवर में टैंकर चलाने का काम करता है और इसी क्रम में नरवर के किला गेट खटीक मोहल्ला में भी उसका आना जाना था जिसके कारण अभियोकतरी/फरियादिया और उसका परिवार भी अभियुक्त से परिचित हो गया अभियोकतरी एक 14 वर्षीय अवयस्क बालिका थी जो अनुसूचित जाति वर्ग की है अभियुक्त  धारा सिंह का उसके यहां आना जाना था घटना दिनांक 9  सितंबर 2016 को अभियुक्त के द्वारा फुसलाए जाने पर परिचय और विश्वास के अंतर्गत अभियुक्त बालिका को नरवर किले के कचहरी महल ले गया और उसके साथ  बलात्कार  किया !
उसके बाद अनेक बार अभियुक्त ने अभियुक्तरी को ग्राम धुवाई भी चलने को बाध्य किया ,तथा पीड़िता व उसके माता पिता को जान से मारने की धमकियां देते हुए पीड़िता के साथ अनेक बार बलात्संग किया !अभियुक्तरी ने अपनी माता को इसकी जानकारी दी अभियुक्तरी की माता ने उसकी चिकित्सकीय जांच कराई जिसके बाद उसके गर्भवती होने की जानकारी हुई! तब  पूछताछ किए जाने पर अभियुक्तरी ने अपनी माता को  आरोपी धारा सिंह द्वारा अपने साथ की गई घटनाओं की जानकारी दी ,तत्पश्चात पीड़िता द्वारा नरवर आरक्षी केंद्र में अपने मातापिता के साथ जाकर लिखित आवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जिस पर से वहां अपराध क्रमांक 69 / 2017 पंजीबद्ध किया जा कर अनुसंधान पश्चात चालान न्यायालय में पेश किया!
न्यायालय ने आरोपी पर भारतीय दंड विधान की धारा 367 ,366, 506(2), 376(2) ,376 (2)(6) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(ठ)/6 अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v)  के अंतर्गत दंडनीय अपराध के आरोप  विरचित किए.
संपूर्ण प्रकरण में विचारण उपरांत विद्वान विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति( अत्याचार निवारण) अधिनियम श्री अरुण कुमार वर्मा ने बालिका के साथ बलात्कार के आरोपी धारा सिंह पुत्र महाराज सिंह कुशवाहा को दोषी पाया!
विद्वान विशेष न्यायाधीश श्री अरुण कुमार वर्मा ने प्रकरण में  उल्लेखित किया कि ,
अन्यथा भी न्यायालय का कार्य   साक्ष्य विवेचन करते हुए भूसे के ढेर में से सुई तलाश करने जैसा कहा जाता है ,अर्थात उसे साक्ष्य के समूह से सत्य और असत्य को उसी प्रकार अलग करना होता है जिस प्रकार भूसे में से अनाज पृथक किया जाता है !
संपूर्ण मामले के विचारण उपरांत विशेष न्यायाधीश श्री अरुण कुमार वर्मा ने आरोपी धारा सिंह कुशवाहा को दोषी पाते हुए  भा.द.वि.की धारा   376(2) मैं 10 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹5000 जुर्माना ,जुर्माना अदा न करने पर  6 माह के अतिरिक्त कारावास, भा द वि की धारा 363 में 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹1000 जुर्माना तथा जुर्माना अदा न करने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास ,धारा 366 में 5वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹2000 जुर्माना ,अदा ना करने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास तथा धारा 506 में 2 वर्ष का सश्रम कारावास  एवं ₹5000 जुर्माना तथा व्यतिक्रम की स्थिति में 6 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा से दंडित किया है न्यायालय ने आरोपी पर कुल ₹13000 अर्थदंड अधिरोपित किया है! अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक श्री स्वरूप नारायण भान ने की!