भाजपा अपने दम पर ही सरकार में बनी रह सकती है

अंकित पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -उत्तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में जीत से उत्साहित विपक्ष को केंद्र सरकार के खिलाफ गोलबंदी में तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) और वाईएसआर-कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव अच्छा हथियार मिल गया है।
Image result for narendra modiशुक्रवार को तेदेपा ने भाजपा नीत राजग से अलग होने की घोषणा कर दी। यही नहीं, वाईएसआर-कांग्रेस से अलग मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा भें अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी दे दिया।
इस तरह मोदी सरकार के खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव के दो नोटिस हैं। सदन में हंगामा के कारण व्यवस्था नहीं होने के आधार पर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिसों को नहीं लिया और कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
दूसरी ओर, लोजपा ने भी उपचुनाव नतीजे पर चिंता जताते हुए भाजपा को आगाह किया कि सहयोगी दलों के साथ ससम्मान 2019 की रणनीति तय की जाए।
शुक्रवार को लोकसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा समेत दूसरे विपक्षी दलों का जो रुख था, वह साफ संकेत था कि तेदेपा और वाईएसआर कांग्रेस के अविश्वास प्रस्तावों को उनका समर्थन है। कांग्रेस व अन्य दलों के नेताओं ने औपचारिक रूप से भी घोषणा कर दी है कि सोमवार को जब फिर से प्रस्ताव लाए जाएंगे तो वे समर्थन देंगे। लोकसभा में तेदेपा के 16 और वाईएसआर कांग्रेस के नौ सदस्य हैं।
सरकार के पास है संख्या बल
सरकार संख्या बल के आधार पर इस संकट से निपटने को लेकर आश्वस्त है, जबकि भाजपा इसे आंध्र में विस्तार के मौके के रूप में देख रही है। तेलंगाना राष्ट्र समिति (लोकसभा में 11 सांसद) ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने से इनकार किया है। जबकि अन्नाद्रमुक (37 सांसद) ने शर्त रखी है कि केंद्र यदि कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन से इनकार करता है तो वह अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है।
इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। अकेले भाजपा ही बहुमत के पार है, जबकि अन्य सहयोगी दल भी साथ खड़े हैं।
जल्द हो सकती है राजग की बैठक
जल्द ही राजग नेताओं की बैठक बुलाई जा सकती है। उन्हें यह संदेश देने की कोशिश होगी कि दो उपचुनाव के नतीजों को लेकर किसी फैसले पर न पहुंचें। उन्हें यह आश्वस्त किया जाएगा कि सहयोगी दलों को पूरा सम्मान मिलेगा और 2019 के चुनाव में सरकार भी भाजपा की ही बनेगी।
वैसे यह भी माना जा रहा है कि भाजपा कर्नाटक चुनाव का इंतजार कर रही है, जहां उसे सत्ता में आने का भरोसा है। अगर ऐसा होता है तो सहयोगी दलों के दबाव से बाहर आने का भी अवसर मिलेगा और विपक्ष के कथित गठबंधन की गांठ भी ढीली पड़ जाएगी।
क्या होगा अविश्वास प्रस्ताव का हश्र
543 सदस्यीय लोकसभा में फिलहाल 536 सांसद हैं। बहुमत के लिए 269 सांसद चाहिए। भाजपा के खुद के 272 सदस्य हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों के 40 से ज्यादा सदस्य हैं। ऐसे में भाजपा अपने दम पर ही सरकार में बनी रह सकती है। यानी अगर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार भी हुआ तो अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तय है।
लोकसभा में तेदेपा के बिना राजग भाजपा : 272 शिवसेना : 18 लोजपा : 06 अकाली दल : 04 अन्य : 11 कुल : 311 राज्य के लिए विशेष दर्जा के मायने केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं के लिए विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को 10 फीसदी हिस्सा देना होता है, जबकि सामान्य राज्य को 40 फीसदी।