पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -अब मैं जंगल का राजा नहीं रहा..., क्या आप मुझे जॉब दे सकते हैं...। जंगल में घुसने की दोबारा कोशिश मत करना...। क्लीन जंगल ड्राइव...। कुछ ऐसे ही संदेश देकर बाघों ने अपने दिल की बात इंसानों तक पहुंचाने की कोशिश की। कार्टून श्रृंखला ने कलाप्रेमियों को भावों से भर दिया। शनिवार को शाहपुरा स्थित आलियांज फ्रांसेज सेंटर में कार्टून प्रदर्शनी देखने बड़ी संख्या में कलाप्रेमी पहुंचे। कार्टून सीरिज में 56 कार्टून शामिल किए हैं, जिसे कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने बनाया है। उन्होंने कार्टून चित्रों में कल्पना और कलात्मकता का अनूठा प्रयोग दिखाया है। प्रदर्शनी का उद्देश्य बाघ संरक्षण को प्रकृति बचाव है।
-दिखे बाघों के जज्बात
प्रदर्शनी के जरिए जानने का मौका मिला कि शेर और इंसान के बीच गहरा संबंध है। बाघ एक वन्य जीव नहीं, बल्कि हमारे जीवन को गतिशीलता देने में उसका भी योगदान है। जिसका संरक्षण जरूरी है। अक्सर इंसान यह नहीं सोचते हैं कि बाघों के भी जज्बात होते हैं। प्रदर्शित कुछ ऐसे ही चित्रों को दिखाया गया। जिसमें बाघ अपने दिल की बात इंसानों को कहते दिखे। कार्टूनों के जरिए बाघ संरक्षण की गहरी बात कही गई। चित्रों में बाघ का दर्द भी बयां किया गया। एक कार्टून में बाघ एक भिखारी के पास जाकर कह रहा था कि मैं अब जंगल का राजा नहीं रहा, कृपया मुझे आप कोई जॉब दे सकते हैं।
-कई रोचक गतिविधियां
प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक रोचक गतिविधियां शामिल की गई हैं। कभी बाघ रेंजर्स को जंगल से खदेड़ रहे हैं तो कभी वे खुद सफाई करते दिखते हैं। प्रदर्शनी दिखाया गया कि एक पिता अपने बेटे को कहता है कि बेटा तू शेर द पुत्तर है और घर में बाघ आकर खड़ा हो जाता है। एक कार्टून में देखने मिला कि, बाघ बीएसएफ में भर्ती होने पहुंचता है। एक अन्य कार्टून में जंगल सफाई अभियान में बाघ दिखाई देता है।

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