पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -महिलाओं के प्रति अपराध की बढ़ती घटनाओं के बीच गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह का मानना है कि कई बार कानूनी कमजोरियों का फायदा उठाकर अपराधी छूट जाते हैं, इसलिए प्रयोग के तौर पर किसी एक बड़े जिले में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लागू किया जाना चाहिए। मंथन न्यूज़ के साथ बातचीत में उन्होंने पुलिस को और अधिक अधिकार दिए जाने की वकालत की। उन्होंने पुलिस के काम में नेताओं के दखल को सिरे से नकार दिया। यह भी कहा कि मैं सक्षम गृह मंत्री हूं, शो पीस की तरह नहीं हूं। मुख्यमंत्री ने भी मुझे 'फ्री हैंड' दे रखा है। पेश है उनसे विशेष बातचीत....
सख्त अधिकार मिल जाते हैं...
- भूपेंद्र सिंह के मुताबिक पुलिस के पास अभी भी अधिकार कम नहीं हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम में अपराधियों के खिलाफ सख्त अधिकार पुलिस को मिल जाते हैं। कई बार कानूनी कमजोरी का लाभ उठाकर अपराधी छूट जाते हैं लेकिन कमिश्नर सिस्टम में ऐसा संभव नहीं होगा।
प्रयोग के तौर पर एक जिले में लागू किया जाए
- प्रदेश के किसी भी एक जिले में प्रयोग के तौर पर पुलिस कमिश्नर प्रणाली की शुरुआत की जाना चाहिए। इसके बाद अपराधों में आई कमी का तुलनात्मक अध्ययन हो, फिर हम आगे पूरे प्रदेश में लागू करने या नहीं करने के बारे में फैसला करें। मैंने पहले भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली की पहल की है। अब एक बार फिर सरकार से इस बारे में बात करुंगा।
राजनीतिक दखल नहीं है...
- मध्य प्रदेश में ऐसी परिस्थितियां नहीं हैं। प्रदेश में किसी भी राजनीतिक दल में आपराधिक पृष्ठभूमि के जनप्रतिनिधियों की संख्या बेहद कम है। यहां ऐसा वातावरण भी नहीं है कि नेता अपराधियों का कवच बनें। एकाध उदाहरण छोड़ दें तो मध्य प्रदेश में कभी किसी नेता ने अपराधियों का समर्थन नहीं किया। राजनीतिक दखलंदाजी के आरोप सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से बचने का एकमात्र तर्क है। जिम्मेदारी से बचने का यह रास्ता है। दो-पांच फीसदी मामलों में अपवाद भी मान लिया जाए तो बाकी मामलों में पुलिस को कार्रवाई करने से किसने रोका है।
थाना प्रभारी (टीआई) को अपने अफसरों का आदेश मानना होता है, विधायक का नहीं..
- विधायक और मंत्रियों की पसंद के टीआई और पुलिस अफसरों के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ रही है यह कहना गलत है। यदि किसी विधायक ने किसी टीआई की सिफारिश की भी है तो क्या, उसे एसपी और आईजी के ही निर्देशों का पालन करना है, विधायक के आदेश का नहीं। टीआई के खिलाफ कार्रवाई के सारे अधिकार एसपी-आईजी के पास होते हैं। अंतिम नियंत्रण उन्हीं का है फिर कैसे वह विधायक के दबाव में गलत काम करेगा। इसका दूसरा पक्ष यह है कि यदि कोई टीआई अच्छा काम कर रहा है तो उसकी सिफरिश में गलत क्या है। इससेकार्यप्रणाली पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
दागियों को फील्ड पोस्टिंग न दी जाए...
- जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ संगीन शिकायतें हैं या उन पर अपराध दर्ज हैं। ऐसे लोगों की फील्ड में पोस्टिंग नहीं की जाना चाहिए। सारी गड़बड़ी यहीं से शुरू होती है। जिन लोगों का रिकार्ड खराब रहा हो और वे थाना पा जाए तो न सिर्फ कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, बल्कि निर्दोष लोग भी पुलिसिया जुल्म के शिकार बनते हैं। ऐसे लोगों की सीआर में सारी गड़बड़ियां दर्ज की जाना चाहिए।
अपराध कम दिखाने एफआईआर नहीं की तो भी होगी कार्रवाई...
- अपराध बढ़ा तो बड़े अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस कारण ऐसा न हो कि एफआईआर दर्ज ही दर्ज नहीं की जाए। एफआईआर दर्ज नहीं की तो भी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। अफसरों को सतर्क रहना ही होगा।
शो पीस नहीं हूं .....
- (क्या ये सही है कि मध्य प्रदेश में गृहमंत्री सिर्फ शो पीस की तरह है, टीआई को हटाने का अधिकार भी गृह मंत्री के पास नहीं है। इस सवाल पर भूपेंद्र सिंह ने ऐसे किया बचाव) मैं शो पीस नहीं हूं। गृह मंत्री के रूप में मिले सारे अधिकार मेरे पास हैं। संविधान में मंत्री को जो शक्तियां प्राप्त होती हैं, वे मेरे पास हैं। गृह मंत्री शो पीस कैसे हो सकता है। मुख्यमंत्री ने मुझे फ्री हैंड दे रखा है। मैं पूरी तरह से सक्षम गृह मंत्री हूं।

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