पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -शिवराज सिंह चौहान तोड़ने नहीं जोड़ने, बिगाड़ने नहीं बनाने में पारंगत हैं। यही उनकी खूबी है, विशिष्टता है। शिवराज जी से मैं सन 1981-82 से जुड़ा हूँ, जब मैं हमीदिया कॉलेज में फर्स्ट इयर में पढ़ता था। मैं विद्यार्थी परिषद से जुड़ा था, लेकिन कॉलेज चुनाव में यूथ पावर पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन करते थे। इस दौरान ही शिवराज जी श्री तपन भौमिक के साथ कॉलेज आये और हमें छात्र राजनीति की बारीकियों को बताया। तब से मैं उनसे लगातार सम्पर्क में रहा।
शिवराज जी ने मुख्यमंत्री निवास में विभिन्न वर्गों की पंचायत बुलाई। उनके कल्याण की योजनाओं की चर्चा की। चर्चा में निकले निष्कर्षों के आधार पर योजनाएँ बनायीं। परिणामस्वरूप उनकी सभी योजनाएँ न केवल प्रदेश में सफल हुईं बल्कि उनकी ख्याति देश और विदेशों में भी हुई।
शिवराज जी की विशेषता है कि वे कभी कोई बात थोपते नहीं। सबकी सुनते हैं, राय लेते हैं और सर्वजन हिताय निर्णय लेते हैं। किसी भी बात पर उनसे चर्चा करो तो वे मुख्यमंत्री की तरह नहीं बड़े भाई की तरह पूरी आत्मीयता से मार्गदर्शन करते हैं। यह उनकी सहजता, सरलता और आत्मीयता ही है कि एक बार जो उनसे मिलता है, उनका मुरीद हो जाता है। उन्होंने बच्चों से मामा का रिश्ता महज नाम के लिए नहीं उसे निभाने के लिए बनाया है।
जब लगता है कि हम बहुत काम करते हैं, थक जाते हैं तब एक बार उनसे मिल लेते हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है। उनके द्वारा रोज किये जा रहे कार्यों की जब जानकारी मिलती है तो लगता है कि हम तो बहुत कम काम कर रहे हैं। इस तरह से उनसे हमेशा और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। उनसे मिलने के बाद काम करने का जोश बढ़ जाता है।

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