रोहिंग्या मुसलमान को सुविधाएं देने पर सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों को मूलभूत सुविधाएं देने के बारे में अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया है। सोमवार को रोहिंग्याओं को देश में प्रवेश और मूलभूत सुविधाएं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर केंद्र सरकार ने गंभीर सवाल उठाया। सरकार ने कहा कि राष्ट्र की संप्रभुता सर्वोपरि है।
rohingya refugees 19 03 2018रोहिंग्याओं की तरफदारी की इतनी जनहित याचिकाएं आ रही हैं। ऐसे में कोर्ट को देखना चाहिए कि वे कौन लोग हैं, जो देश की भौगोलिक स्थिति बदलना चाहते हैं? देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। सरकार ने यह भी कहा कि चिकित्सा आदि की सुविधा नागरिकों और गैर नागरिकों सभी को समान रूप से मिलती है। इसके बारे में कोर्ट को अलग से आदेश देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने मामले को नौ अप्रैल को अंतिम सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया है।
रोहिंग्याओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने मिर्च पाउडर और स्टेनगन हमले के आरोपों से तो इन्कार किया है, लेकिन कहा है कि पासपोर्ट एक्ट के तहत किसी को भी वैध यात्रा दस्तावेज के बिना देश आने नहीं दिया जा सकता। इसका मतलब है कि सरकार मान रही है कि वह घुसने की कोशिश कर रहे रोहिंग्याओं को वापस धकेलती है, क्योंकि जनसंहार के भय से शरण के लिए भाग रहे रोहिंग्याओं के पास पासपोर्ट नहीं होता। उन्हें मानवीय अधार पर प्रवेश दिया जाना चाहिए। सरकार ने हलफनामे में स्वीकार किया है कि रोहिंग्याओं को भी नागरिकों के समान ही चिकित्सा आदि की सुविधा मिलती है। कोर्ट इसी आधार पर रोहिंग्याओं को चिकित्सा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं देने का अंतरिम आदेश दे।
लेकिन, केंद्र की ओर से पेश एएसजी तुषार मेहता ने इसका जबरदस्त विरोध किया। मेहता ने कहा कि जब सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि सभी को समान रूप से चिकित्सा सुविधा दी जाती है, तो मामला यहीं खत्म हो जाता है। मेहता ने कहा कि राष्ट्र की संप्रभुता सर्वोपरि है। यह देश हित का मामला है।
मेहता ने कहा कि बांग्लादेश और म्यांमार के साथ हमारी सीमा कई जगह से खुली है, जिससे घुसपैठ होती है। सरकार इसका हल राजनयिक स्तर पर निकालने की कोशिश कर रही है। कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। तभी रोहिंग्याओं की तरफदारी करते हुए कांग्र्रेस के नेता और पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि यह ठीक है कि देश की संप्रभुता सर्वोपरि है। लेकिन जीवन का मौलिक अधिकार भी महत्वपूर्ण है। कोर्ट देखे कि मानवाधिकारों के संरक्षण में भारत कहां खड़ा है। लेकिन रोहिंग्याओं का विरोध करने वाले भी कम नहीं थे। वकील महेश जेठमलानी और अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि पहले केस की मेरिट पर विचार होना चाहिए। देखा जाए कि सरकार का इस बारे में कोई दायित्व बनता भी है कि नहीं।
कैंपों में रह रहे रोहिंग्याओं की सुविधाओं पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा और जम्मू के कैम्पों में रह रहे रोहिंग्याओं को मूलभूत सुविधाएं जैसे पीने का पानी, टॉयलेट और शिक्षा नहीं मिलने के आरोपों पर केंद्र सरकार से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में कैंपों में रह रहे रोहिंग्याओं को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।