रोहिंग्याओं के खिलाफ संघ का तेवर सख्त, बताया देश की सुरक्षा के लिए खतरा

rssपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत कार्यवाह पुरुषोत्तम दधीचि ने कहा है कि जम्मू में अवैध रूप से बसे रोहिंग्याओं के साथ घुसपैठिए जैसा बर्ताव किया जाए और उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए। रोहिंग्या जम्मू के लोगों व देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। 

आरएसएस की नागपुर में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बारे में जानकारी देने के लिए संघ ने शनिवार को पत्रकार वार्ता बुलाई गई। इसमें अमर उजाला संवाददाता के एक सवाल पर दधीचि ने रोहिंग्याओं के मामले में नरमी नहीं बरते जाने की वकालत की। 

उन्होंने कहा कि संघ अपना पक्ष केंद्रीय नेतृत्व व सरकार के समक्ष रख चुका है। वहीं, प्रांत संघ चालक ब्रिगेडियर सुचेत सिंह से नौशेरा, सुंदरबनी और कालाकोट में जिले की मांग पर चल रहे आंदोलन के बारे पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सबसे पहले कोटरंका में एडीसी बैठाने के फैसले की समीक्षा होनी चाहिए।

 पीडीपी-भाजपा सरकार की कार्यशैली पर उन्होंने कहा कि संघ अपना काम कर रहा है। सरकार अपने तरीके से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में संघ की 277 दैनिक शाखाएं, 119 साप्ताहिक मिलन व 125 मासिक मंडलियां चल रही हैं।
कश्मीर में दैनिक शाखा तो नहीं हैं, लेकिन संघ समय-समय पर कार्यक्रम करता रहता है। उन्होंने बताया कि नौ से 11 मार्च तक नागपुर में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में 1538 अपेक्षित प्रतिनिधियों में से 1461 ने हिस्सा लिया। 

जम्मू-कश्मीर से 18 प्रतिनिधि बैठक में मौजूद रहे। बैठक में देश में प्रचलित विभिन्न भाषाएं व बोलियों के संरक्षण व संवर्धन के संबंध में महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रतिनिधियों ने पारित किया। डेक्कन हेराल्ड में छपे 18 फरवरी के अंक के अनुसार भारत की 40 बोलियां विलुप्त होने के कगार पर हैं।

 भारत में 197 भारतीय भाषाएं और बोलियां संकट में हैं। विगत 50 सालों में 250 भाषाएं या बोलियां विलुप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि देश स्तर पर चल रहे संघ के रचनात्मक एवं सकारात्मक कार्यों से प्रेरित होकर नए-नए लोग संघ से जुड़ना चाहते हैं।

 विशेष रूप से युवा एवं विद्यार्थियों ने इसमें विशेष रुचि दिखाई है। संघ की अधिकृत वेबसाइट पर ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से 2017 में जम्मू कश्मीर से लगभग 666 बंधु संघ से जुड़ चुके हैं। पत्रकार वार्ता में नव नियुक्त प्रांत प्रचारक रुपेश मौजूद नहीं रहे