पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर में एकजुट हुए सपा और बसपा की जीत ने भाजपा विरोधी पार्टियों को चुनाव में एकजुट होने का मंत्र दे दिया है. अब मध्य प्रदेश की चुनावी सियासत में भी योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर शिवराज को घेरने के लिए अखिलेश यादव और मायावती, कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकते हैं.दरअसल, उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को हारने का जो फार्मूला हिट हुआ उसे एमपी में कांग्रेस ने फौरन लपक लिया है. अब इस फार्मूले को कांग्रेस ने आगामी चुनाव में अपनाने की कवायद तेज कर दी है.
दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में राहुल गांधी ने यूपीए को मजबूत करने के संकेत दिए हैं. तो मध्यप्रदेश में भी बीजेपी के मुकाबले खुद को मजबूत करने के लिए कांग्रेस, सपा और बसपा एक साथ आने को तैयार दिख रहे हैं.
हालांकि प्रदेश में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रहता है. लेकिन ग्वालियर-चंबर और विंध्य की दो दर्जन सीट ऐसी है जहां सपा और बसपा का खासा प्रभाव है. और मौजूदा विधानसभा में इस बार चार विधायक बसपा के हैं. 2013 के चुनाव में कई सीटें ऐसी थीं, जहां बसपा दूसरे या फिर तीसरे नंबर पर रही.
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में राजनैतिक दलों को मिले वोटों के गणित को समझने की कोशिश करें तो, बीजेपी को 44.87 फीसदी वोट मिले,
कांग्रेस 36.37 फीसदी वोट मिले
बसपा को 6.2865 वोट
सपा को 1.1960 वोट और
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी 1.0005 वोट हासिल हुए.
अगर कांग्रेस, बसपा, सपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के वोट प्रतिशत को एक कर दें तो. 44.853 फीसदी होता है. यानि कि बीजेपी को मिले कुल वोटों के बराबर. मतलब साफ है कि प्रदेश में अगर गठबंधन होता है, तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ना तय है.
प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की बात हो या फिर उपचुनाव, तीसरे मोर्चे के दलों ने बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस को अपना समर्थन देने का काम किया है. 2019 के चुनाव से पहले होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल एकजुट होकर बीजेपी को पटखनी देने की तैयारी में है.

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