20 प्रतिशत नगरीय निकायों के कर्मचारियों को नहीं मिलेगा सातवां वेतनमान

मंथन न्यूज़ भोपाल -नगरीय विकास विभाग ने नगरीय निकायों के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन उसमें एक पेंच भी फंसा दिया है। इससे करीब 20 फीसदी नगरीय निकाय अपने कर्मचारियों को बिना वित्त विभाग की अनुमति के सातवां वेतनमान नहीं दे पाएंगे। सूत्रों के मुताबिक इन निकायों को सातवां वेतनमान देने के लिए राजस्व वसूली बढ़ानी होगी।
pay scale 10 04 2018विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यदि नगर निगमों का स्थापना व्यय राजस्व आय का 55 प्रतिशत और नगर पालिका-नगर परिषदों का स्थापना व्यय राजस्व आय का 60 प्रतिशत से कम है तो ही निकाय अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान दे सकता है। इसके साथ ही अगले तीन सालों में निकायों को स्थापना व्यय 5 प्रतिशत घटाना होगा। जो नगरीय निकाय इस शर्त पर खरे नहीं उतरते हैं, उन्हें अपने कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने के लिए वित्त विभाग की अनुमति लेनी होगी।
नगरीय निकाय खुद वहन करेंगे खर्च
विभाग ने आदेश में कहा है कि कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने में आने वाला खर्च नगरीय निकायों को स्वयं वहन करना होगा। राज्य सरकार इसके लिए अनुदान नहीं देगी। इसके साथ ही निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सातवां वेतनमान लागू करने से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
नाराज हो सकते हैं कर्मचारी
राज्य सरकार के इस फैसले से नगरीय निकायों के कर्मचारी नाराज हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग ने निकायों के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने के लिए स्थापना व्यय से जुड़ी शर्त डाली है। इस फैसले से नागदा, बुरहानपुर सहित करीब 75 नगरीय निकाय अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ा सकेंगे। गौरतलब है कि वित्त विभाग ने नगरीय निकायों के कर्मचारियों के लिए 55 प्रतिशत से ज्यादा स्थापना व्यय न होने की शर्त रखी है, जबकि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों की तनख्वाह पर राजस्व आय का करीब 80 फीसदी खर्च करती है।
वसूली बढ़ाने के लिए डाली शर्त
सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग ने स्थापना व्यय से जुडी शर्त इसलिए डाली है, ताकि नगरीय निकाय ज्यादा से ज्यादा राजस्व वसूली कर सकें और निकायों की आय बढ़े। गौरतलब है कि कई नगरीय निकाय प्रॉपटी टैक्स सहित अन्य कर वसूलने में काफी फिसड्डी हैं।
20 अप्रैल को काम बंद
मप्र नगर निगम नगर पालिका कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि सरकार 74 हजार निकाय कर्मचारियों के साथ पक्षपात कर रही है। यदि आदेश संशोधित नहीं किया गया तो 18 अप्रैल को नगरीय विकास संचालनालय के सामने आदेश की होली जलाई जाएगी और 20 अप्रैल को काम बंद किया जाएगा। बुधवार को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को आदेश का विरोध पत्र भेजा जाएगा।