क्या अब होगा क्या अब होगा आरक्षण की नीति पर पुर्नविचार जरूरी

मंथन न्यूज़ भोपाल -देश में आरक्षण लागू होने के साथ ही विवादों में रहा है। कुछ समय बाद यह मुद्दा फिर से गर्माया हुआ है। जाति के आधार पर पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ लेने का पुरजोर विरोध हो रहा है। इसको लेकर भारत बंद तक का अवाहन किया जा चुका है। युवाओं का कहना है आरक्षण जाति आधारित न होकर अर्थिक स्थित पर आधारित हो। आरक्षण के आधार पर नौकरी तो ठीक है पर प्रामोशन प्रतिभा और काम के आधार पर ही होना चाहिए। आरक्षण के कारण समाज और व्यवस्था दो भागों में विभाजित हो रही है। आरक्षण नीति पर पुर्नविचार की जरूरत है।
योग्यता के साथ कुठाराघात
Image result for manthannews/in photoमेरा मानना है कि आरक्षण देश में एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर सभी के अलग-अलग विचार हैं। योग्यता को प्राथमिकता बनाना भविष्य के लिए बेहतर है। आरक्षण के कारण कई बार योग्य व्यक्ति अवसर चूक जाता है।
-पिंकी गोयल, प्रोफशन
आंदोलन ठीक नहीं
देश में लंबे अर्से सेआरक्षण का मुद्दा छाया रहा है। बेहतर यह होगा कि सक्षम व्यक्ति यदि आरक्षण की परिधि में आ रहा है तो उसे किसी दूसरे को अवसर देना चाहिए। देश में इस मुद्दे को लेकर हमेशा आंदोलन की स्थिति बनी रहती है जो कि गलत है।
-शुभम साहू, स्टूडेंट्स
समाजिक समानता का मिले अधिकार
आरक्षण का आधार सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ापन है। गांवों में आज भी 90 प्रतिशत लोगों के साथ छुआछूत और भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया जाता है। जब तक पूरी तरह से सामाजिक समानता स्थापित नहीं हो जाती आरक्षण समाप्त नहीं होना चाहिए। आरक्षण यदि समाप्त करते हैं तो सामाजिक समानता का अधिकार दिया जाना चाहिए। साथ ही आरक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन किए जाने की जरूरत है।
गब्बर सिंह, युवा लेखक
आरक्षण व्यवस्था की हो समीक्षा
आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होना चाहिए। क्योंकि आरक्षण की जरूरत गरीबों को है, उन्हें आगे लाने के लिए आरक्षण व्यवस्था की जानी चाहिए। आरक्षण खत्म न करके इसका आधार गरीबी कर देना चाहिए। दूसरी तरफ सवर्ण युवाओं में यह भावना घर कर रही है कि हम कितने ही प्रतिशत से पास हों लेकिन सरकारी जॉब या सुविधाएं आरक्षण प्राप्त युवाओं को मिलेगी। ऐसे में मनमुटाव की स्थिति बन रही है।
संदीप श्रीवास्तव, पीआरओ, अटल बिहारी हिंदी विवि
जातिगत राजनीति गलत
भारत में जाति के पैमाने को खत्म कर देना चाहिए। आरक्षण के लिए हिंसा करना देशवासियों को शोभा नहीं देता। समाज को विकसित करने के लिए जाति और धर्म के आधार पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
पंकज कसरादे,छात्र
नीति पर हो फिर विचार
आरक्षण नीति को फिर से बेहतर बनाने की कोशिशें होनी चाहिए। आमतौर पर इसे देश में समुदाय विशेष से जोड़कर ही देखा जाता है। आरक्षण नीति व्यक्ति के उत्थान के लिए है न की हिंसात्मक गतिविधियों के लिए।
सुनील वर्मा, प्रोफेशनल