*एक ही प्रदेश के दो जिले दतिया और शिवपुरी योजनाएं भी एक क्रियान्वयन की क्षमताओं का फर्क दतिया अब्बल तो शिवपुरी पिछड़ा*

*एक ही प्रदेश के दो जिले दतिया और शिवपुरी योजनाएं भी एक क्रियान्वयन  की क्षमताओं का फर्क दतिया अब्बल तो शिवपुरी पिछड़ा*

मध्य प्रदेश के दो जिले शिवपुरी और दतिया की दूरी आपस में 100 किलोमीटर से भी कम है और दोनों ही जिलों में योजनाओं की बात करें तो एक ही समय में दोनों जिलों में एक ही जैसी योजनाएं लागू हुई फर्क रहा तो सिर्फ और सिर्फ क्रियान्वयन कार्य करने की क्षमताओं और योजनाओं की मॉनिटरिंग का!
हम बात करें शिवपुरी की तो शिवपुरी एक समय में मिनी शिमला के लिए मशहूर था! पर्यटन के नए आयाम यहां स्थापित हो सकते थे! पर हुआ उल्टा पर्यटन के क्षेत्र में भी शिवपुरी पुरी तरह पीछे छूट गया! और मिनी शिमला कहलाने वाला शहर आज बेबस और पिछड़ा शहर बन गया! वही मां पीतांबरा की नगरी दतिया कल तक पिछड़े शहर में गिना जाता था! आज वह विकास की ऊंचाइयों और देश के नक्शे पर भी अलग पहचान बना चुका है

*सिंध जलावर्धन का क्रियान्वयन*

सिंध योजना की बात करें तो दतिया में सिंध योजना का पानी हर घर के नलों द्वारा उपयोग किया जा रहा है! वहीं नल जल योजना से 80 के लगभग गांव में पानी पहुंचाया गया है! वही शिवपुरी में 2007 की मंजूर सिंध परियोजना का पानी 2018 तक भी घरों तक नहीं पहुंच सका! यहां पानी की समस्या विकराल रूप धारण किए हुए हैं जनता पानी की कमी के चलते चलते पलायन करने को मजबूर है!

*उद्योग और रोजगार*

उद्योग और रोजगार के नए आयाम दतिया में स्थापित हुए हैं! नया मेडिकल कॉलेज से लेकर नया कलेक्टर परिषद नया न्यायालय से लेकर ओवर ब्रिज ने दतिया का स्वरुप ही बदल दिया! वही शिवपुरी में उद्योगों का नामोनिशान तक नहीं है ना ही सड़कों का जाल और ना ही पर्यटन को बढ़ावा देने के क्षेत्र में कोई कार्य हुआ है! शिवपुरी की हालत के लिए जिम्मेदार यहां पर हावी बादशाहत और जनता में पनपती बादशाहत की हुकूमत ही कहेंगे!