मंथन न्यूज़ दिल्ली -कानून मंत्रालय की समिति ने माना है कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव दो चरणों में कराए जा सकते हैं। समिति ने सरकार के एक राष्ट्र, एक चुनाव संबंधी विचार को आकार देने का प्रयास किया है। समिति के आंतरिक प्रक्रिया पत्र में 2019 के शुरू में दो चरणों में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की सिफारिश की गई है।
दस्तावेज में इस प्रयास को प्रभावी बनाने के लिए विधानसभाओं के कार्यकाल को कम करने या बढ़ाने के उद्देश्य से संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
दस्तावेज में इस प्रयास को प्रभावी बनाने के लिए विधानसभाओं के कार्यकाल को कम करने या बढ़ाने के उद्देश्य से संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
प्रक्रिया पत्र पर 17 अप्रैल को विधि आयोग की पूर्ण बैठक में चर्चा की जाएगी। यह मसौदा दस्तावेज है और इसपर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। कानून मंत्रालय की समिति से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को कहा कि यदि सदस्य सुझाव देंगे तो कानून मंत्रालय को अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले इसमें बदलाव किए जा सकते हैं
पहले चरण के राज्य-
जिन राज्यों को पहले चरण में लिया जा सकता है वहां 2021 में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं।
दूसरे चरण के राज्य-
दूसरे चरण में आने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब शामिल हैं। लोकसभा चुनाव के साथ इन राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने के लिए इन राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल का विस्तार करना होगा।
अविश्वास प्रस्ताव के साथ हो विश्वास मत-
चुनाव आयोग द्वारा दिए गए सुझाव पर प्रक्रिया पत्र में यह भी कहा गया है कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद विश्वास मत का प्रस्ताव भी हो। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि यदि विपक्ष के पास वैकल्पिक सरकार बनाने लायक संख्या नहीं है तो शासन कर रहे गुट को नहीं हटाया जा सकता है।

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