पुलिस ने माना - उपद्रव होने की नहीं लगी थी भनक

Related imageपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -पुराने शहर में मंगलवार रात को हुए उपद्रव में असामाजिक तत्वों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें आग के हवाले कर दिया था, लेकिन भोपाल की जिला विशेष शाखा (डीएसबी) और स्पेशल ब्रांच (एसबी) को इसकी भनक तक नहीं थी। यही कारण रहा कि पुलिस लोगों को नियंत्रित नहीं कर पाई और हालात बेकाबू हो गए। खुद पुलिस ने इस बात को माना है, लेकिन इस बहाने के साथ कि यह तात्कालिक घटना थी। लिहाजा, पहले से कोई कदम नहीं उठाए जा सके। घटना के बाद अब कोई भी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
ऐसे काम करती है खुफिया एजेंसी
डीएसबी और एसबी खुफिया जानकारी जुटाने का काम करती है। यह राजनीतिक पार्टियों, धार्मिक संगठनों, अपराधियों और आम लोगों के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित करते हैं। हर दिन की रिपोर्ट एडीजी इंटीलेजेंस को की जाती है। एडीजी खुद मुख्यमंत्री को पूरी रिपोर्ट सौंपते हैं। उसके बाद सभी एसपी को उनसे संबंधित सूचनाएं दे दी जाती हैं।
सबसे बड़ी चूक
इस मामले में सबसे बड़ी चूक यह रही कि पुलिस को कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए। ऐसे में बात बिगड़ती गई। हालात ज्यादा बिगड़ने के बाद ही पुलिस को सख्ती से निपटने के निर्देश मिले, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
सवाल - सवाल यह उठता है कि आखिर डीएसबी और एसबी के पास घटना के पहले कोई सूचना क्यों नहीं थी? और अगर सूचना थी, तो फिर उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? अगर मान ले कि घटना तात्कालिक थी तो हालात कैसे बिगड़ गए? यह कुछ सवाल हैं, जिसका पता तो जांच के बाद ही चल पाएगा, लेकिन लोगों को होने वाली आर्थिक और मानसिक क्षति की पूर्ति कैसे होगी?
तात्कालिक घटना थी
पुराने भोपाल में हुई घटना तात्कालिक थी। इसके लिए पहले से कोई योजना बनाने की बात सामने नहीं आई है। -विवेक लाल, एएआईजी डीएसबी
समय पर ध्यान देते तो नहीं बनते ऐसे हालात भी
ऐसा हो ही नहीं सकता कि इंटेलिजेंस को इसकी खबर न हो। यदि समय पर ध्यान दे देते तो बात इतनी नहीं बिगड़ती। वैसे भी जानकारी दो स्तर पर आती है एक डिस्ट्रिक स्पेशल ब्रांच और दूसरी पुलिस मुख्यालय की भी स्पेशल ब्रांच (एसबी) होती है। दोनों ही अपने-अपने स्तर पर जानकारियां एकत्रित करती रहती हैं, इसलिए यह कहा जाना कि जानकारी ही नहीं थी, यह गलत है। हालांकि समय रहते भी सारी चीजें नियंत्रित कर ली गई वो अच्छा रहा। - एससी त्रिपाठी, पूर्व डीजी