सिंधिया ने कहा : आपसी सहमति से विवाद खत्म करने को सहमत

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ ग्वालियर - सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को संपत्ति विवाद को लेकर चल रहे अपने सिविल दावे में एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया कि वह अपनी तीनों बुआओं से आपसी सहमति से समझौता करने के लिए तैयार हैं। इससे पूर्व भी विवाद खत्म करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला था। अब फिर से आपसी सहमति से निराकरण के लिए तैयार हैं और कोर्ट जो भी आदेश पारित करेगा, वह उन्हें मान्य होगा।jyotiraditya s 06 10 2017
वहीं दूसरी ओर प्रतिवादी की ओर से कोई सहमति पत्र पेश नहीं किया गया। प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं ने सिंधिया के आवेदन की कॉपी लेने के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर दिया। 9 नवंबर को इस केस में सुनवाई होगी।
सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संपत्ति बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में जिला सत्र न्यायालय में सिविल दावा पेश किया है। यह दावा 1990 से जिला कोर्ट में चल रहा है। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सचिन शर्मा की कोर्ट में चल रही है।
25 सितंबर 2017 को कोर्ट ने वादी व प्रतिवादी को यह कहते हुए समझौते के लिए मौका दिया था कि वादी व प्रतिवादी समझदार हैं और चाहें तो समझौता कर अपने विवाद को खुद सुलझा सकते हैं और जनता के सामने एक उदाहरण पेश कर सकते हैं। आपसी समझौते से जो भी निष्कर्ष निकले उससे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने वादी व प्रतिवादी को 6 अक्टूबर तक सहमति पत्र पेश करने का आदेश दिया था। सांसद सिंधिया की ओर से शुक्रवार को सहमति को लेकर एक आवेदन कोर्ट में पेश किया गया।
इसमें उन्होंने बताया कि आपसी सहमति से समझौते के वे लिए तैयार हैं। पूर्व में भी आपसी समझते का प्रयास किया गया था। इसे मीडिएशन में भी लेकर गए और उनकी ओर से मीडिएशन के लिए कोर्ट फीस भी जमा की गई। इसका कोई परिणाम नहीं निकला। वहीं दूसरी ओर प्रतिवादियों की ओर से सहमति को लेकर जवाब नहीं आया है।
राजमाता की मौत के बाद संपत्ति पर आ गए उनके वारिसानों के नाम
सन 1976 में राजमाता व माधवराव सिंधिया के बीच संपत्ति का बंटवारा हो गया था, लेकिन दोनों के निधन के बाद संपत्ति में यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे, ऊषा राजे का नाम रिकार्ड पर आया है। इन तीनों के नाम संपत्ति में न आएं, इसको लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक सिविल दावा जिला कोर्ट में लगाया है। इस दावे में मांग की है कि सिंधिया राजवंश की संपत्ति का उन्हें एकमय स्वामित्व दिया जाए।
सिविल दावे में तर्क दिया कि ज्योतिरादित्य राजा के पुत्र हैं। उनके परिवार में राजा की गद्दी का कानून चलता है। राजा की गद्दी उसके बेटे को मिलती है। गद्दी मिलने पर संपत्ति पर पूर्ण अधिकार राजा का होता है। ज्योतिरादित्य अकेले वारिश हैं। इसलिए संपत्ति पर उनका एकाधिकार है। उनकी संपत्ति पर किसी दूसरे का नाम न दर्ज किया जाए।
ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनकी बुआ यशोधरा राजे, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व ऊषा राजे के बीच संपत्ति विवाद चल रहा है। तीनों बुआओं को उन्होंने प्रतिवादी बनाया है।