ऐसा क्या हुआ आयकर विभाग पहली बार टैक्स वसूली के लिए चौराहों पर उतरा

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग पहली बार टैक्स वसूली के लिए चौराहों पर उतर आया है। लोगों को आयकर के प्रति जागरुक करने नुक्कड़ नाटक तक होने लगे हैं। 22 हजार 173 करोड़ रुपए के टारगेट का पीछा करने में अफसर पसीने-पसीने हो रहे हैं। मार्च में उनके सामने हर दिन 250 करोड़ रुपए वसूलने की चुनौती है। बड़े करदाताओं के हाथ खींच लेने से यह नौबत आई है।income tax 01 03 2018
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह पहला मौका है जब टैक्स वसूलने के लिए लोगों के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं। मप्र-छग में हजारों करोड़ रुपए का टैक्स भरने वाली कोयला कंपनियों के हाथ खींच लेने से विभाग को नए ठिकाने ढूंढने पड़ रहे हैं। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड दोनों मिलकर ही विभाग के खजाने में आठ हजार करोड़ रुपए का टैक्स दे देती हैं, लेकिन इस बार उत्पादन और व्यवसाय गिरने से उनका हाथ भी तंग हो गया है।
नए करदाताओं की तलाश
'कोढ़ में खाज" वाली स्थिति एनएचडीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के चलते बन गई। दोनों बैंक ने इस साल से अपना टैक्स मुंबई में भरना शुरू कर दिया है। जबकि एनएचडीसी के टैक्स में कमी आ गई है। इस कारण मप्र का टैक्स करीब एक हजार करोड़ रुपए गिर गया। यही वजह है कि दोनों राज्यों में विभाग को नए करदाताओं के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं। 
नाटक और ब्रांड एंबेसडर भी
टारगेट की चुनौती से निपटने और करदाताओं का दायरा बढ़ाने के लिए प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त पीके दाश ने नुक्कड़ नाटक, विचार अड्डा, ब्रांड एम्बेसडर की अपील और करदाताओं को फ्री कानूनी मदद देने जैसी पहल शुरू की है। दोनों राज्यों में इस समय 30 लाख से अधिक करदाता हैं। इस साल ढाई लाख से ज्यादा नए करदाता जुड़े हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला टैक्स विभाग के लिए 'खुरचन" जैसा ही है।
'वार फ्रंट" वाली स्थिति
विभागीय सूत्र कहते हैं कि मार्च के पहले तीन सप्ताह उनके लिए 'वार फ्रंट" वाली स्थिति है। शनिवार-रविवार और छुट्टी भुला दी गईं हैं। अब टैक्स चोरों को दबोचने के लिए छोटे शहरों में सख्ती की जा रही है।
विभाग के खुफिया तंत्र की रिपोर्ट है कि छोटे-मझोले शहरों और गांवों में कई ऐसे धन्नाासेठ मौजूद हैं जो करोड़ों का कारोबार करते हैं लेकिन आयकर विभाग में रिटर्न तक नहीं भरते। अब उन पर नकेल कसी जाएगी। आगामी वर्षों में ये लोग ही बड़े करदाता के रूप में सामने आएंगे।