मंथन न्यूज़ -इस साल के अंत में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस सत्ता में वापसी करने के लिए कमर कस रही है, वहीं बीजेपी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एकबार फिर सत्ता पर अपना आधिपत्य कायम रखने के लिए मैदान में उतरेगी।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भले ही कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन अच्छा न रहा हो लेकिन उपचुनाव में बार-बार पार्टी ने सफलता के झंडे गाड़े हैं। प्रदेश में हुए विधानसभा के पांच उपचुनावों में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यही नहीं रतलाम लोकसभा सीट, अटेर, चित्रकूट की जीत ये बता दिया है कि आने वाले समय में किस पार्टी का वर्चस्व रहेगा।
प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के पास फिलहाल मुख्यमंत्री पद का कोई तय नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पार्टी के अंदर की गुटबाजी। दिग्विजय सिंह दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका अपना एक अलग गुट है। वहीं कमलनाथ भी इस पद के लिए कमर कसकर बैठे हुए हैं। एक और धड़ा है राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन के पुत्र अजय सिंह का। वो राज्य विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं और कांग्रेस सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री भी। उनकी भी अपनी दावेदारी है।
इन सबके बीच एक नाम है गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का। हाल ही में भोपाल में हुई एक पार्टी बैठक में उन्होंने कहा, 'अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की स्थिति करो या मरो की है।' वह कहते हैं कि उपचुनाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि वो मेरे ही क्षेत्र में हुए थे। बकौल सिंधिया पिछले 14 सालों में यहां 27 बार उपचुनाव और विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें से पिछले 6 में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की है।

प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के पास फिलहाल मुख्यमंत्री पद का कोई तय नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है पार्टी के अंदर की गुटबाजी। दिग्विजय सिंह दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका अपना एक अलग गुट है। वहीं कमलनाथ भी इस पद के लिए कमर कसकर बैठे हुए हैं। एक और धड़ा है राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अर्जुन के पुत्र अजय सिंह का। वो राज्य विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं और कांग्रेस सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री भी। उनकी भी अपनी दावेदारी है।
इन सबके बीच एक नाम है गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का। हाल ही में भोपाल में हुई एक पार्टी बैठक में उन्होंने कहा, 'अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की स्थिति करो या मरो की है।' वह कहते हैं कि उपचुनाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि वो मेरे ही क्षेत्र में हुए थे। बकौल सिंधिया पिछले 14 सालों में यहां 27 बार उपचुनाव और विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें से पिछले 6 में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की है।
हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी युवा टीम के साथ एक सेल्फी शेयर की थी, जिसमें सिंधिया को भी देखा जा सकता है। इसका स्पष्ट संदेश यह है कि राज्य में कांग्रेस पार्टी उन्हें चेहरा बनाकर चुनाव में उतार सकती है।
ज्योतिरादित्य कहते हैं, 'मैं आपको स्पष्ट करना चाहता हूं कि पिछले दिनों हुआ उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल नहीं था, बल्कि इसे फाइनल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस उपचुनाव में भी मुख्यमंत्री चौहान का पूरा मंत्रालय जुटा था, जबकि उनके सामने केवल कांग्रेस के आम कार्यकर्ता थे। कांग्रेस पार्टी के दोनों उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा दुष्प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
आगामी चुनाव के मद्देनजर सिंधिया का मानना है कांग्रेस की स्थिति मध्यप्रदेश में काफी मजबूत बनी हुई है। बस हमें एक मोटीवेटिंग फैक्टर और एजेंडा की जरूरत है। इसके लिए कांग्रेस का नेतृत्व मिलकर अगले सात-आठ महीने मिलकर काम करेगा। यह पूछे जाने पर की बीजेपी का चेहरा तो एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान होंगे, लेकिन कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, उन्होंने इसे टाल दिया।
गौरतलब है कि पिछले कई चुनावों के दौरान ज्योतिरादित्य कह चुके हैं कि चुनाव से पहले चेहरा बता देना अच्छा होता है। सिंधिया का मानना है कि चुनाव जनता के विश्वास से जीता जाता है और वह इस मुहिम के साथ काम कर रहे हैं।
बीजेपी के 15 सालों के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए सिंधिया ने कहा कि सरकार ने निवेशकों के सम्मेलन के अलावा किया क्या है? अब जनता जवाब चाहती है कि किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए क्या किया है। पिछले 15 साल में एक बड़ी इंडस्ट्री भी राज्य में नहीं आई है।
ज्योतिरादित्य कहते हैं, 'मैं आपको स्पष्ट करना चाहता हूं कि पिछले दिनों हुआ उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल नहीं था, बल्कि इसे फाइनल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस उपचुनाव में भी मुख्यमंत्री चौहान का पूरा मंत्रालय जुटा था, जबकि उनके सामने केवल कांग्रेस के आम कार्यकर्ता थे। कांग्रेस पार्टी के दोनों उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा दुष्प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
आगामी चुनाव के मद्देनजर सिंधिया का मानना है कांग्रेस की स्थिति मध्यप्रदेश में काफी मजबूत बनी हुई है। बस हमें एक मोटीवेटिंग फैक्टर और एजेंडा की जरूरत है। इसके लिए कांग्रेस का नेतृत्व मिलकर अगले सात-आठ महीने मिलकर काम करेगा। यह पूछे जाने पर की बीजेपी का चेहरा तो एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान होंगे, लेकिन कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, उन्होंने इसे टाल दिया।
गौरतलब है कि पिछले कई चुनावों के दौरान ज्योतिरादित्य कह चुके हैं कि चुनाव से पहले चेहरा बता देना अच्छा होता है। सिंधिया का मानना है कि चुनाव जनता के विश्वास से जीता जाता है और वह इस मुहिम के साथ काम कर रहे हैं।
बीजेपी के 15 सालों के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए सिंधिया ने कहा कि सरकार ने निवेशकों के सम्मेलन के अलावा किया क्या है? अब जनता जवाब चाहती है कि किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए क्या किया है। पिछले 15 साल में एक बड़ी इंडस्ट्री भी राज्य में नहीं आई है।

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