व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
संख्या, धन, तकनीक, कुतर्क बल के सहारे सत्ता सौपानों तक पहुंचने या बने रहने की प्रतिस्पर्धा के चलते जहां लोकतंत्र सशक्त संगठनों की जकड़ महसूस कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर विचार विहीन तकनीक से लैस बौद्धिक कुतर्क अवसर से पूर्व ही प्रतिभाओं, विद्या, विद्ववानों के दमन कर रहा है। जीवन मूल्यों को रौंधती हमारी सत्ता उन्मुख शैली अब धीरे-धीरे लोकतंत्र पर संगठनात्मक रुप से इतनी हावी हो चली है कि अब आम आदमी का सत्ता में भागीदार होना और राष्ट्र जनकल्याण का उसका सपना काफुर होता जान पड़ता है। ऐसा नहीं कि ऐसा कुछ इस महान राष्ट्र में अभी हो रहा है। अब्बल यह तो आजादी के बाद से ही दबे पाव भारतीय लोकतंत्र में प्रचलित रहा। जिसमें इसके क्रियान्वयन का आधार सिद्धान्त: कुछ और व्यवहारिक तौर पर कुछ जुदा रहा है।
अगर यो कहे कि संगठन के नाम पर जिस तरह से राजनैतिक दलों के क्रिया कलाप दबाव समूह के रुप में परिलक्षित होते दिखाई पड़ते है। उन्होंने अब भारतीय लोकतंत्र में गैर राजनैतिक दबाव समूह को भी अप्रमाणिक तौर पर निस्तानाबूत कर उनका स्थान ले लिया है जैसी कि आजकल आम चर्चा है।
जबकि लोकतंत्र में दल वैचारिक और चुने हुये जनप्रतिनिधि जनता व देश-प्रदेश नगर, गांव के प्रति जबावदेह होते है न कि किसी दल, संगठन के। ये अलग बात है कि चुनावों में वैचारिक दलों का लाभ चुनते वक्त जनप्रतिनिधियों को अवश्य मिलता है। मगर जब पंचायत, परिषद, विधान मण्डल, संसद में नीति, निर्णय होते है उनकी मान्यता निर्णय में बहुमत के आधार पर निर्धारित होती है। मगर विहिप व्यवस्था ने सदनों में लोकतांत्रिक निर्णयों को कमजोर करने का काम किया है जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिये दुर्भाग्य पूर्ण ही कहा जायेगा।
मगर सबसे अहम बात यह है कि जिस तरह से संख्या, धन, तकनीक, कुर्तक, बल के सहारे राष्ट्र की प्रतिभा, विद्या, विद्ववानों आम मेहनतकश नागरिकों को सत्ता सौपानो से दूर रख, यह सशक्त संगठन सत्ता सौपानों तक पहुंचने या सत्ता में बने रहने, साम, नाम, दण्ड, भेद की नीति-रीति अपना रहे है। जो न तो राष्ट्र न ही जनहित मेें रहने वाली है, न ही इनसे कोई सुखद परिणामों की उम्मीद, बेहतर हो कि देश में ऐसी रीति-नीति की शुरुआत हो जो सुखद व परिणाम मूलक कही जा सके। जिससे हम अपने जीवन मूल्यों की रक्षा कर अपनी प्रतिभा, विद्या, विद्ववानों मेहनतकश लोगों के सहारे राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल बना स्वयं पर गर्व महसूस कर सके।

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